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दुर्लभ जन्मजात बीमारी से जूझ रहे नवजात को श्री शिशु भवन हॉस्पिटल नें दिया नवजीवन

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📡 Bilateral Choanal Atresia से था पीड़ित, एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट, जटिल सर्जरी और करीब 30 दिनों के उपचार के बाद स्वस्थ होकर लौटा घर…

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। 11 अगस्त 2026
श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर की विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम ने गंभीर एवं दुर्लभ जन्मजात बीमारी Bilateral Choanal Atresia (बिलेट्रल कोएनल एट्रेसिया) से जूझ रहे एक नवजात का सफल उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया। गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचे नवजात को करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट, आवश्यक जटिल सर्जिकल उपचार तथा लगभग 30 दिनों तक सतत चिकित्सा एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की गई, उपचार के बाद नवजात पूरी तरह स्थिर एवं स्वस्थ अवस्था में 08 अगस्त 2026 को अपनें माता-पिता के साथ घर लौट गया।

📡 जन्म के तुरंत बाद बिगड़ी हालत…

बेबी ऑफ गौसिया परवीन, निवासी लोरमी, वार्ड क्रमांक-2, डोंगरी पारा, जिला मुंगेली का जन्म 03 जुलाई 2026 को हुआ था, जन्म के तत्काल बाद नवजात को सांस लेने में गंभीर परेशानी होनें लगी, जांच में दोनों नासिका मार्ग जन्म से ही बंद पाए गए, जिसके कारण उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई थी।

नवजात को उसी दिन उपचार के लिए श्री शिशु भवन हॉस्पिटल, बिलासपुर लाया गया, डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम नें तत्काल उपचार शुरू किया। प्राथमिकता नवजात की श्वसन क्षमता एवं ऑक्सीजन स्तर को नियंत्रित कर उसकी स्थिति को स्थिर करना था।

📡 क्या है Bilateral Choanal Atresia…?

इस दुर्लभ जन्मजात स्थिति के संबंध में डॉ. श्रीकांत गिरी नें बताया कि Bilateral Choanal Atresia में नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं, नवजात शिशुओं में शुरुआती अवस्था में नाक से सांस लेने की प्रवृत्ति अधिक होती है, ऐसे में दोनों नासिका मार्ग बंद होनें पर गंभीर श्वसन संकट और शरीर में ऑक्सीजन की कमी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

गंभीर मामलों में बच्चे का रंग नीला पड़ना तथा जीवन के लिए खतरा उत्पन्न होना संभव है, इसलिए ऐसे मामलों में समय पर पहचान, तत्काल श्वसन सहायता और विशेषज्ञ उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है।

डॉ. गिरी के अनुसार, उपचार के दौरान सबसे पहले नवजात की सांस एवं ऑक्सीजन की स्थिति को स्थिर किया जाता है, आवश्यकता पड़नें पर वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जाता है और स्थिति नियंत्रित होने के बाद बंद वायुमार्ग को खोलनें के लिए आवश्यक सर्जिकल उपचार किया जाता है।

📡 एक सप्ताह वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा नवजात…

नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया, इस दौरान चिकित्सकीय टीम नें उसकी स्थिति की लगातार निगरानी की।

स्वास्थ्य स्थिति आवश्यक रूप से स्थिर होनें के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों नें पूरी तैयारी और सावधानी के साथ जटिल सर्जिकल उपचार किया, सर्जरी के बाद भी नवजात को निरंतर चिकित्सकीय निगरानी एवं विशेष नर्सिंग केयर में रखा गया।

लगभग 30 दिनों की सतत चिकित्सा, निगरानी और विशेष देखभाल के बाद नवजात की स्वास्थ्य स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसे 08 अगस्त को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

📡 बहु-विषयक चिकित्सकीय टीम के समन्वय से मिली सफलता…

इस चुनौतीपूर्ण उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी एवं डॉ. मोनिका जायसवाल सहित पूरी चिकित्सकीय टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

अस्पताल प्रबंधक  नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग एवं सपोर्ट स्टाफ नें भी नवजात की देखभाल में पूरी संवेदनशीलता, तत्परता और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई।

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इस उपचार की सफलता किसी एक चिकित्सक के प्रयास का परिणाम नहीं, बल्कि नियोनेटल, सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग एवं सपोर्ट टीम के बीच बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयास का परिणाम रही, नवजात को अस्पताल पहुंचनें के बाद स्थिर करनें से लेकर सर्जिकल उपचार और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल तक प्रत्येक चरण में विशेष निगरानी रखी गई।

📡 स्वस्थ बच्चे को गोद में लेकर भावुक हुए माता-पिता…

करीब एक महीने के उपचार के बाद जब नवजात स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ, तो यह परिवार के लिए बेहद भावुक और खुशी का क्षण था। अपने बच्चे को स्वस्थ अवस्था में गोद में लेकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिवार ने उपचार में शामिल चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अस्पताल की पूरी टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

श्री शिशु भवन हॉस्पिटल की यह सफलता गंभीर नवजात मामलों में समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं, अत्याधुनिक श्वसन सहायता, जटिल सर्जिकल प्रबंधन, सतत निगरानी और टीमवर्क के महत्व को दर्शाती है।

एक नन्ही जिंदगी को मिला नया जीवन-और एक परिवार की उम्मीद हुई साकार।

जारीकर्ता:
श्री शिशु भवन हॉस्पिटल
मध्यनगरी चौक, ईदगाह रोड
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
दिनांक: 08 अगस्त 2026

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

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