तिल्दा नेवरा


विद्युत व्यवस्था के नाम पर ठेका खेल: चंद घंटों में जवाब दे रहीं स्ट्रीट लाइटें, नगरपालिका की भूमिका संदेह के घेरे में



तिल्दा-नेवरा।नगरपालिका द्वारा शहर की विद्युत व्यवस्था सुधार के नाम पर कराए गए स्ट्रीट लाइट कार्य अब ठेका–भ्रष्टाचार की ओर इशारा करने लगे हैं। नई लाइटें लगने के कुछ ही घंटों या दिनों में बंद होने लगीं, जिससे उनकी गुणवत्ता और खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
शहर के कई वार्डों में स्थिति यह है कि कहीं लाइटें जलती-बुझती रहती हैं तो कहीं पूरी तरह अंधेरा पसरा है। नागरिकों का आरोप है कि जिन स्ट्रीट लाइटों को “उच्च गुणवत्ता” और “लंबी अवधि” का बताया गया था, वे स्थापना के तुरंत बाद ही फेल हो गईं। इससे यह संदेह गहराता जा रहा है कि घटिया सामग्री को महंगे दामों में खपाया गया।
स्थानीय लोगों और पार्षदों का कहना है कि यह केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि सुनियोजित ठेका खेल का मामला प्रतीत होता है। सवाल उठ रहे हैं कि
ठेका किस आधार पर और किसे दिया गया?
क्या निविदा (टेंडर) प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा थी या पहले से तय ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया?
क्या गुणवत्ता जांच (क्वालिटी टेस्टिंग) वास्तव में हुई या केवल फाइलों में पूरी दिखाई गई?
आरोप है कि बिना मानक जांच के ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया, और अब मरम्मत के नाम पर दोबारा खर्च दिखाने की तैयारी है। यदि यह सही है, तो यह सीधे-सीधे नगरपालिका के राजस्व का दुरुपयोग और जनता के साथ धोखा माना जाएगा।
नागरिकों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब स्ट्रीट लाइटों के नाम पर ऐसा हुआ हो। हर कुछ महीनों में नई लाइटें लगती हैं, फिर खराब होती हैं और फिर मरम्मत व रिप्लेसमेंट के नाम पर नया बिल पास कर दिया जाता है। इससे यह आशंका और मजबूत होती जा रही है कि लाइटें जानबूझकर कम गुणवत्ता की लगाई जा रही हैं ताकि बार-बार भुगतान का रास्ता खुला रहे।
इस पूरे मामले में नगरपालिका के विद्युत शाखा, तकनीकी अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि निरीक्षण सही ढंग से हुआ होता, तो लाइटें चंद घंटों में जवाब नहीं देतीं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि
पूरे स्ट्रीट लाइट ठेके की वित्तीय व तकनीकी जांच कराई जाए
लाइटों की थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच हो
दोषी ठेकेदार के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई तय की जाए
फिलहाल नगरपालिका की ओर से इस पूरे प्रकरण पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से शहर अंधेरे में डूब रहा है, उससे साफ है कि यह मामला केवल लाइट खराब होने का नहीं, बल्कि नगरपालिका में चल रहे संभावित ठेका भ्रष्टाचार का गंभीर संकेत है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर पर्दा डालता है या फिर जनहित में सख्त कार्रवाई कर मिसाल कायम करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest