दूध नदी स्वच्छता अभियान में उमड़ा जनसैलाब, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने संभाली कमान
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कांकेर की जीवनदायिनी दूध नदी को स्वच्छ और संरक्षित बनाने के लिए चला विशेष अभियान, विधायक ने दिए सौंदर्यीकरण और पौधरोपण के निर्देश…
उत्तर बस्तर कांकेर, छत्तीसगढ़। 30 मई 2026
कांकेर नगर की जीवनदायिनी दूध नदी के संरक्षण, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण को लेकर शनिवार सुबह व्यापक स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया, पुरानें बस स्टैंड के पीछे स्थित दूध नदी के अपवाह क्षेत्र में चले इस अभियान में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन के अधिकारियों, स्वयंसेवी संगठनों तथा बड़ी संख्या में नगरवासियों नें सक्रिय सहभागिता निभाई।
अभियान के दौरान नदी तटों पर जमा कचरे को हटाया गया, खरपतवारों की सफाई की गई तथा नदी के आसपास स्वच्छ वातावरण बनानें के लिए श्रमदान किया गया, सुबह 06:00 बजे से 08:00 बजे तक चले इस कार्यक्रम में कांकेर विधायक आशाराम नेताम, नगर पालिका परिषद कांकेर के अध्यक्ष अरूण कौशिक तथा कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी स्वयं सफाई कार्य में जुटे रहे।
अभियान के दौरान विधायक आशाराम नेताम नें मानसून आगमन के साथ नदी के दोनों किनारों पर नारियल एवं आम के पौधे रोपित करनें, सुरक्षा हेतु टो-वॉल निर्माण करानें तथा नदी तटों के दोनों ओर अतिक्रमण हटाकर पाथ-वे विकसित करनें के निर्देश दिए, उन्होंने नगरवासियों से प्रत्येक शनिवार और रविवार को स्वच्छता अभियान चलाकर दूध नदी को स्वच्छ एवं निर्मल बनाए रखनें की अपील भी की, साथ ही लोगों से कचरा केवल निर्धारित स्थानों पर ही डालनें का आग्रह किया।
कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर नें नगर के मध्य से बहनें वाली दूध नदी के समग्र सौंदर्यीकरण और स्थायी स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करनें के लिए एस.डी.एम. एवं नगर पालिका प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए, उन्होंने कहा कि नदी का संरक्षण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनसहभागिता से ही इसके सकारात्मक परिणाम सामनें आएंगे।
स्वच्छता अभियान में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मण्डावी, एस.डी.एम. अरूण वर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यशवंत साहू, नगर पालिका उपाध्यक्ष उत्तम यादव, चेम्बर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष अनूप शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता महेश जैन, पप्पू मोटवानी, राजा देवनानी सहित विभिन्न वार्डों के पार्षदगण और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
यह अभियान न केवल नदी की स्वच्छता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनजागरूकता का भी सशक्त संदेश देकर गया।



