

📡 मातृभूमि की पावन धूलि से अभिषिक्त इस पुण्यभूमि पर, आज मैं उस भाव को अभिव्यक्त करनें का प्रयास कर रही हूँ, जो हमारे जीवन का प्राणतत्व है- देशभक्ति…
देशभक्ति केवल एक शब्द नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व और जीवन-मूल्यों की गरिमा है, यदि देशप्रेम एक सुगंधित पुष्प है, तो देशभक्ति उसका अमृततुल्य फल है, हमारी भारतीय संस्कृति नें सदैव कहा है- “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” जननी हमें जीवन देती है और जन्मभूमि हमें पहचान, संस्कार एवं अस्तित्व प्रदान करती है, इसलिए अपनी मातृभूमि की संस्कृति, परंपरा, अस्मिता, एकता और गरिमा की रक्षा करना हमारा सर्वोच्च दायित्व है।
आज का यह पावन दिवस हमें उस ऐतिहासिक क्षण की स्मृति कराता है, जब भारत नें परतंत्रता की लंबी रात के बाद स्वतंत्रता का सूर्य उदय होते देखा, यह स्वतंत्रता सहज प्राप्त नहीं हुई, इसके पीछे अनगिनत ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों, क्रांतिकारियों, सत्याग्रहियों, शूरवीरों और राष्ट्रभक्तों का त्याग, तपस्या, संघर्ष और बलिदान समाहित है।
हमारे लिए स्वतंत्रता केवल इतिहास की कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जीवंत उत्तरदायित्व है, इसे प्राप्त करनें के साथ-साथ इसकी गरिमा, लोकतांत्रिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है।
जब आज हम तिरंगे को आकाश में लहराते हुए देखते हैं, तो वह केवल तीन रंगों से निर्मित ध्वज नहीं दिखाई देता; उसमें हमें अनगिनत बलिदानों की स्मृति, राष्ट्र की अस्मिता और करोड़ों भारतीयों की आशाओं का प्रतिबिंब दिखाई देता है।
📡 बलिदान से मिली स्वतंत्रता, कर्म से सजेगा राष्ट्र…
हमारे स्वतंत्रता सेनानियों नें अपनें व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं से ऊपर राष्ट्र को रखा, उनके कर्म श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्मयोग की जीवंत अभिव्यक्ति बन गए, उन्होंने फल की चिंता किए बिना राष्ट्रहित में अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
महान व्यक्ति वही होता है, जिसकी पहचान उसके शब्दों से नहीं, बल्कि उसके कर्मों और त्याग से होती है, हमारे स्वतंत्रता सेनानी इसी महान परंपरा के प्रतीक हैं।
📡 लेकिन आज हमारी जिम्मेदारी क्या है…?
क्या केवल राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा फहराना, देशभक्ति के नारे लगाना और राष्ट्रगीत गाना ही देशभक्ति है?
📡 नहीं…।
सच्ची देशभक्ति हमारे दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कर्तव्यों में दिखाई देती है…
ईमानदारी से अपना कार्य करना,
कानून और संविधान का सम्मान करना,
समाज में सद्भाव बनाए रखना,
प्रकृति और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना,
कमजोर और जरूरतमंद की सहायता करना
और अपने अधिकारों के साथ अपनें कर्तव्यों को भी समझना।
यही वह देशभक्ति है, जो राष्ट्र को भीतर से मजबूत बनाती है।

📡 आज की पीढ़ी का संकल्प…
वर्तमान समय में भौतिकवाद, स्वार्थ और नैतिक मूल्यों के क्षरण जैसी चुनौतियाँ हमारे सामनें हैं, ऐसे समय में हमारी पीढ़ी को यह संकल्प लेना होगा कि देशभक्ति केवल भाषणों, नारों और भावनाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हमारे आचरण और कर्मों में दिखाई देगी।
हमें ऐसा भारत बनाना है, जहाँ जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र, आर्थिक स्थिति अथवा किसी अन्य भेद से ऊपर उठकर राष्ट्रहित सर्वोपरि हो।
क्योंकि भारत की स्वतंत्रता किसी एक वर्ग, जाति, धर्म, क्षेत्र या व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं थी।
स्वतंत्रता संग्राम में सभी धर्मों और जातियों, अमीर और गरीब, शिक्षित और अशिक्षित, ग्रामीण और शहरी, नारी और पुरुष, सभी नें अपनें-अपनें सामर्थ्य के अनुसार योगदान दिया।
इतिहास के पन्नों पर कुछ महान नेतृत्वकर्ताओं और क्रांतिकारियों के नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हुए, लेकिन स्वतंत्रता की उस विराट यात्रा में असंख्य ज्ञात-अज्ञात जननायकों और सामान्य नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण थी।
किसी का त्याग बड़ा था, किसी का छोटा नहीं;
किसी का नाम इतिहास में आया, किसी का नहीं-
लेकिन स्वतंत्रता की नींव सबके योगदान से मजबूत हुई।
उनके कर्म ही उनके कर्मयोग बन गए और उनका त्याग ही आज हमारी स्वतंत्रता की आधारशिला है।
📡 शहीदों को नमन…
**मरकर के वो अमर हो गए, हम जीकर के क्या पाए हैं?
मरना उनका पर्व हो गया, दुश्मन भी गुण गाए हैं।ओ शहीदों के मठ पर हम सब फूल चढ़ाने जाते हैं,
उन पावन स्मृतियों के सम्मुख मन को सुकून दिलाते हैं।**
पत्थर समझकर फूल न चढ़ाओ,
उन स्मृतियों को हृदय में बसाओ।
जिनके त्याग से मिली स्वतंत्रता,
उनके आदर्शों को जीवन में अपनाओ।
शहीदों की स्मृति केवल पुष्प अर्पित करनें से जीवित नहीं रहती; वह तब जीवित रहती है, जब हम उनके आदर्शों को अपनें जीवन में उतारते हैं।
📡 आइए, आज संकल्प लें…
इस पावन राष्ट्रीय पर्व पर हम संकल्प लें कि अपनें जीवन के प्रत्येक क्षण, प्रत्येक कर्म और प्रत्येक दायित्व को राष्ट्रहित से जोड़नें का प्रयास करेंगे।
हम अपने परिवार को संस्कार देंगे,
समाज में सद्भाव बढ़ाएँगे,
अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करेंगे,
राष्ट्र की एकता और अखंडता की रक्षा करेंगे
और अपने कर्मों से भारत को और अधिक सशक्त, समृद्ध एवं गौरवशाली बनाने में योगदान देंगे।
यही हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
यही तिरंगे के प्रति सच्चा सम्मान होगा।
और यही सच्ची देशभक्ति होगी।
📡 वन्दे मातरम्…!
📡 भारत माता की जय…!
📡 जय हिन्द…!
✨️ ऋचा चंद्राकर ‘तत्वाकांक्षी’



