विश्व आदिवासी दिवस पर छत्तीसगढ़ को गरीबी, बेरोजगारी और अन्याय से मुक्त राज्य बनाने का संकल्प लेने की अपील
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रायपुर। 10/08/26
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर 9 अगस्त 2026 को राजधानी रायपुर के राजेंद्र नगर स्थित बौद्ध विहार हॉल में फुले अंबेडकर विचार मंच का द्वितीय स्थापना समारोह एवं संगोष्ठी आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष जे.पी. बौद्ध ने की। आयोजन में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, विचारक, सामाजिक कार्यकर्ता और बहुजन आंदोलन से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय संयुक्त मोर्चा भारत के राष्ट्रीय संयोजक गोपाल ऋषिकर भारती, बहुजन आंदोलन के संस्थापकों में शामिल इंजीनियर टी.आर. खूंटे, पूर्व जज एल.पी. मात्रे, महाप्रबंधक संदीप केशकर, कृषि विभाग के पूर्व उपसंचालक एल.पी. गायकवाड़, वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विशाखा बौद्ध, अधिवक्ता भंजन जांगड़े, जातीय उन्मूलन संगठन के तुहीन देव, मूलनिवासी मुक्ति मोर्चा के प्रदेश महासचिव प्रेम मानिकपुरी और रिपब्लिकन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश मेश्राम सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत में जे.पी. बौद्ध ने संस्था के द्वितीय स्थापना वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मंच का उद्देश्य समाज के प्रबुद्ध लोगों को मानव कल्याण और सामाजिक परिवर्तन के मिशन से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि संस्था लगातार सभा, सम्मेलन और विचार-विमर्श के माध्यम से सामाजिक जागरूकता बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
*संविधान की पूर्ण अमल में लाने और आदिवासी कोड की मांग*
मुख्य वक्ता गोपाल ऋषिकर भारती ने कहा कि 27 जून 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना आंदोलन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 20 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। उन्होंने बताया कि इन मांगों में संविधान की सुरक्षा, सम्मान और पूर्ण अमल, ओबीसी जनगणना के लिए अलग कॉलम, आदिवासी कोड लागू करने तथा छत्तीसगढ़ को गरीबी, बेरोजगारी और अन्याय से मुक्त आदर्श राज्य बनाने जैसी मांगें प्रमुख थीं।

भारती ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सरकार और सर्वसमाज से छत्तीसगढ़ के विकास एवं सामाजिक न्याय के लिए ठोस संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश के अन्न और जल का उपयोग लोग करते हैं, उसके विकास में प्रत्येक नागरिक को अपनी क्षमता के अनुसार समय, संसाधन और हुनर का योगदान देने की भावना विकसित करनी चाहिए।
*सामाजिक भेदभाव के खिलाफ जनजागरण पर जोर*
भारती ने अपने संबोधन में जातीय भेदभाव, लिंगभेद, सांप्रदायिकता और छुआछूत जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ व्यापक जनजागरण की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि समाज में समानता, संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी समुदायों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने कहा कि विभिन्न सामाजिक सुधारकों और महापुरुषों ने अपने-अपने समय में सामाजिक असमानता और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया। उनके विचारों को आगे बढ़ाते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सामाजिक आंदोलन को मजबूत करने की जरूरत है।
अपने संबोधन में उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों को लेकर महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं तथा बहुजन समाज के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक जनभागीदारी और लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन जरूरी है।
*समग्र क्रांति के लिए एकजुट होने का आह्वान*
भारती ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, समानता और आर्थिक अवसरों को मजबूत करने के लिए व्यापक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से एकजुट होकर जनहित के मुद्दों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि संघर्ष लंबा हो सकता है, लेकिन सामाजिक न्याय और समानता के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखना होगा। कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी सामाजिक समरसता, संवैधानिक अधिकारों और समानता आधारित समाज निर्माण को लेकर अपने विचार रखे।



