मोपका नाबालिग मामले में नया मोड़: थाना प्रभारी पर मारपीट के आरोप, मेडिकल परीक्षण में पुष्टि नहीं होनें का पुलिस का दावा
📡 36garhnewsupdate.com...


📡 नाबालिग से कथित छेड़छाड़ के मामले में आरोपी गिरफ्तार होकर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया; पुलिस अधिकारी पर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच की मांग…
बिलासपुर/मोपका, छत्तीसगढ़। 10 अगस्त 2026
मोपका क्षेत्र में 14 वर्षीय नाबालिग से कथित छेड़छाड़ और शिकायत के बाद समझौते के लिए दबाव बनाए जानें के मामले में पुलिस कार्रवाई के बाद अब एक नया विवाद सामनें आया है, पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजे जानें के बाद एक तथाकथित अधिवक्ता द्वारा थाना प्रभारी पर आरोपी के साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाए जानें की बात सामनें आई है।
पुलिस पक्ष के अनुसार आरोपी का दो बार चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया है, पुलिस का दावा है कि उपलब्ध मेडिकल परीक्षण में आरोपी के साथ मारपीट किए जानें की पुष्टि नहीं हुई, आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जानें के दौरान भी उपलब्ध जानकारी के अनुसार मारपीट से संबंधित कोई स्पष्ट तथ्य सामनें नहीं आया।
ऐसे में थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच किए जानें की आवश्यकता है, ताकि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

📡 पिता के आवेदन के बाद हुई पुलिस कार्रवाई…
मामले में नाबालिग के पिता नें 08 अगस्त 2026 को चौकी मोपका में लिखित आवेदन दिया था, आवेदन में कथित छेड़छाड़ करनें वाले आरोपी तथा शिकायत के बाद समझौते के लिए दबाव बनानें वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी।
आवेदन में पिता द्वारा आरोप लगाया गया है कि आरोपी करीब दो महीनें से उनकी नाबालिग बेटी का स्कूल आते-जाते पीछा कर परेशान कर रहा था, परिवार की ओर से समझाइश दिए जानें के बावजूद कथित गतिविधियां जारी रहनें की बात भी आवेदन में कही गई है।
आवेदन के अनुसार लगातार भय और परेशानी के कारण बच्ची द्वारा स्कूल जानें से इनकार करनें की बात भी सामनें आई है।
📡 शिकायत वापस लेनें के लिए दबाव का भी आरोप…
नाबालिग के पिता के आवेदन के मुताबिक शिकायत दर्ज होनें के बाद आरोपी के परिवार के कुछ सदस्यों और उसके साथियों द्वारा शिकायत वापस लेनें तथा समझौता करनें के लिए दबाव बनाए जानें का आरोप लगाया गया है।
मामले में पुलिस नें अपराध क्रमांक 1139/26 दर्ज कर धारा 78, 79 BNS एवं धारा 12 पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की है, पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजे जानें की जानकारी सामनें आई है।
📡 थाना प्रभारी पर मारपीट के आरोप से बदला घटनाक्रम…
आरोपी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के बाद थाना प्रभारी पर उसके साथ मारपीट किए जानें का आरोप लगाए जानें से मामले नें नया मोड़ ले लिया है।
पुलिस पक्ष का कहना है कि इस तरह के गंभीर आरोपों की पुष्टि केवल आरोप या बयान के आधार पर नहीं, बल्कि चिकित्सकीय दस्तावेज और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों के आधार पर की जानी चाहिए।
पुलिस के अनुसार आरोपी का दो बार मेडिकल परीक्षण कराया गया और उपलब्ध रिपोर्ट में मारपीट की पुष्टि नहीं हुई, आरोपी को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जानें के दौरान भी उपलब्ध जानकारी के अनुसार मारपीट से संबंधित स्पष्ट तथ्य सामनें नहीं आए।
📡 मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति…
थाना प्रभारी पर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता जाननें के लिए मेडिकल रिपोर्ट के साथ-साथ मजिस्ट्रेट के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यदि जांच के दौरान आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो लगाए गए आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ सकता है, वहीं यदि जांच में कोई ठोस साक्ष्य सामनें आता है तो उसके आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसलिए किसी भी पक्ष के आरोप को जांच पूरी होनें से पहले अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
📡 नाबालिग की शिकायत और पुलिस अधिकारी पर आरोप- दोनों की निष्पक्ष जांच जरूरी…
मामला नाबालिग से संबंधित होनें के कारण अत्यंत संवेदनशील है, नाबालिग और उसके परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच किया जाना आवश्यक है, साथ ही पुलिस अधिकारी पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की भी निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से जांच होनी चाहिए।
मामले में उपलब्ध दस्तावेज, मेडिकल रिपोर्ट, न्यायिक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही यह स्पष्ट किया जा सकता है कि घटनाक्रम में वास्तविक रूप से क्या हुआ।
📡 जांच के बाद ही सामनें आएगा पूरा सच…
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस नें नाबालिग की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया और न्यायिक प्रक्रिया के तहत रिमांड पर भेजा है, दूसरी ओर, थाना प्रभारी पर लगाए गए मारपीट के आरोपों की पुष्टि को लेकर पुलिस पक्ष मेडिकल परीक्षण में इसकी पुष्टि नहीं होनें का दावा कर रहा है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच ही सभी आरोपों की वास्तविकता सामनें ला सकती है, जांच पूरी होनें से पहले किसी भी पक्ष को दोषी या निर्दोष घोषित करना उचित नहीं होगा।
📡 नोट…
नाबालिग की पहचान, नाम, पता अथवा पहचान उजागर करने वाली किसी भी जानकारी को कानून के अनुरूप सार्वजनिक नहीं किया गया है, समाचार में उल्लेखित आरोप संबंधित पक्षों के दावों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं, इन्हें अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है, मामले की अंतिम स्थिति सक्षम जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के परिणाम के आधार पर ही निर्धारित होगी।



