कोरबा दीपका उपचुनाव मामला हाईकोर्ट पहुंचा: प्रत्याशी ने लगाया मनमानी और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
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नामांकन निरस्त होने के बाद न्यायालय की शरण में पहुंचीं शोभा तिग्गा, हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी उम्मीदें…
बिलासपुर/कोरबा, छत्तीसगढ़। 30 मई 2026
कोरबा जिले के नगर पालिका परिषद दीपका के वार्ड क्रमांक 15 में होनेअं वाले उपचुनाव को लेकर विवाद गहरा गया है, वार्ड से पार्षद पद की दावेदार शोभा तिग्गा नें अपना नामांकन स्वीकार नहीं किए जानें के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, उन्होंने आरोप लगाया है कि चुनाव लड़नें से रोकनें के उद्देश्य से नगर पालिका प्रशासन द्वारा कानून में प्रावधान नहीं होनें के बावजूद अतिरिक्त शर्तें थोपकर उनका नामांकन निरस्त किया गया।
याचिकाकर्ता नें अपनें अधिवक्ता अंशुल तिवारी के माध्यम से दायर याचिका में राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग, जिला निर्वाचन अधिकारी कोरबा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी दीपका तथा संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को प्रतिवादी बनाया है।
चुनावी प्रक्रिया के बीच उठा विवाद…
याचिका के अनुसार, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 11 मई 2026 को जारी अधिसूचना के तहत वार्ड क्रमांक 15 में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई थी, नामांकन दाखिल करनें की अंतिम तिथि 18 मई निर्धारित थी, जबकि मतदान 01 जून और मतगणना 04 जून 2026 को प्रस्तावित है।
शोभा तिग्गा नें दावा किया है कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ नामांकन पत्र प्रस्तुत करनें की तैयारी कर ली थी, हालांकि नामांकन जमा करनें के दौरान उन्हें नगर पालिका से संबंधित एक अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करनें के लिए कहा गया, जिसके चलते उनका नामांकन स्वीकार नहीं किया गया।
दुकान के एन.ओ.सी. को बनाया गया मुद्दा…
याचिका में बताया गया है कि वर्ष 2021 में शोभा तिग्गा नें नगर पालिका दीपका के चौपाटी परिसर स्थित दुकान क्रमांक 06 के संचालन के लिए अनुबंध किया था और उस समय से संबंधित सभी देय राशि का भुगतान भी कर दिया था।
आरोप है कि 18 मई 2026 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) द्वारा जारी पत्र में दुकान से संबंधित अनापत्ति प्रमाण पत्र (N.O.C.) अथवा पंचनामा प्रस्तुत करनें की शर्त रखी गई, इसके बाद शोभा तिग्गा नें स्वयं नगर पालिका कार्यालय में आवेदन देकर एन.ओ.सी. जारी करनें का अनुरोध किया, लेकिन समय रहते उन्हें यह दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि नगर पालिका नें कभी भी उनके विरुद्ध किसी प्रकार की बकाया राशि, मांग नोटिस या वसूली की कार्रवाई नहीं की है, ऐसे में एन.ओ.सी. की अनिवार्यता पूरी तरह मनमानी और कानून के विपरीत है।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप…
याचिका में कहा गया है कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है, शोभा तिग्गा का दावा है कि वे छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 35 के अंतर्गत किसी भी प्रकार की अयोग्यता (Disqualification) की श्रेणी में नहीं आतीं।
उनका तर्क है कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है, जो किसी पूर्व किरायेदारी या दुकान संचालन से संबंधित एन.ओ.सी. को पार्षद पद के लिए नामांकन की अनिवार्य शर्त बनाता हो, इसलिए प्रशासन अतिरिक्त शर्त लगाकर किसी उम्मीदवार को चुनाव लड़नें से वंचित नहीं कर सकता।
“लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन”…
शोभा तिग्गा नें अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा जारी पत्र का उद्देश्य उन्हें चुनावी मैदान से बाहर करना था, उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक शक्तियों के मनमानें उपयोग का मामला बताया है।
याचिका में विवादित पत्र को निरस्त करनें तथा बिना किसी अतिरिक्त और गैर-कानूनी दस्तावेज की मांग के उनके नामांकन को स्वीकार करनें के निर्देश देनें की मांग की गई है।
हाईकोर्ट के फैसले पर निगाहें…
उपचुनाव की प्रक्रिया जारी रहनें के बीच यह मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के समक्ष है, ऐसे में न्यायालय का आगामी निर्णय न केवल शोभा तिग्गा की उम्मीदवारी बल्कि पूरे उपचुनाव की दिशा तय करनें में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की निगाहें अब इस मामले पर टिक गई हैं।



