“एक घंटे का नोटिस… फिर बुलडोजर कार्रवाई” बिल्हा में प्रशासनिक कार्रवाई पर विवाद, तहसीलदार राजेंद्र भारत पर पक्षपात और दबाव में कार्रवाई के आरोप
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बिलासपुर/बिल्हा, छत्तीसगढ़। 29 मई 2026
बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र में सड़क किनारे वर्षों से फल दुकान संचालित कर रहे दुकानदारों पर की गई प्रशासनिक बेदखली कार्रवाई अब विवादों में घिर गई है। प्रभावित परिवारों ने तहसीलदार राजेंद्र भारत पर सत्ता पक्ष के दबाव में जल्दबाजी और अमानवीय तरीके से कार्रवाई करने का आरोप लगाया है।
पीड़ित दुकानदारों का कहना है कि उन्हें कार्रवाई से महज एक घंटे पहले नोटिस दिया गया और उसके तुरंत बाद जेसीबी मशीन पहुंचाकर तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। परिवारों के अनुसार, 28 मार्च को दोपहर लगभग 1 बजे नोटिस थमाया गया और 2 बजे प्रशासनिक अमला बुलडोजर के साथ मौके पर पहुंच गया।
दुकानदारों ने बताया कि NHAI द्वारा पूर्व में जिस हिस्से को खाली करने के निर्देश दिए गए थे, उसे वे पहले ही छोड़ चुके थे और पीछे हटकर दुकान संचालित कर रहे थे। उनका दावा है कि वे करीब 60 वर्षों से उसी स्थान पर फल व्यवसाय कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
महिलाओं ने लगाया अमानवीय कार्रवाई का आरोप…
प्रभावित महिलाओं ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें छोटे बच्चों, घरेलू सामान और दुकान का सामान तक हटाने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया। कार्रवाई के दौरान अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और परिवार खुद को असहाय महसूस करता रहा।
मामला न्यायालय में लंबित होने का दावा…
दुकानदारों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने बताया कि सभी पक्षकार तहसीलदार न्यायालय में अपना जवाब प्रस्तुत कर चुके थे। उन्होंने दावा किया कि कुछ प्रभावितों को संबंधित भूमि प्रकरण में स्थगन आदेश (स्टे) भी प्राप्त है तथा मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
वकील के अनुसार प्रशासन से कम से कम एक सप्ताह का समय मांगा गया था, लेकिन इसके बावजूद अवकाश के दिन भी जल्दबाजी में कार्रवाई की गई।
सत्ता पक्ष और प्रशासन की सांठगांठ के आरोप…
स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई राजनीतिक दबाव में की गई। उनका कहना है कि सरकारी जमीन को निजी बताकर गरीब दुकानदारों पर दबाव बनाया जा रहा है। लोगों ने प्रशासन और सत्ता पक्ष के बीच सांठगांठ होने का भी आरोप लगाया है।
मीडिया के सवालों पर तहसीलदार ने नहीं दिया जवाब…
कार्रवाई के दौरान पत्रकारों ने तहसीलदार राजेंद्र भारत से नोटिस और तत्काल कार्रवाई को लेकर सवाल पूछे, लेकिन उन्होंने मीडिया से बातचीत करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पत्रकारों से कहा —
“जो लिखना है लिख लीजिए, मैं कोई बाइट नहीं दूंगा, मैं नियम अनुसार काम कर रहा हूं।”
उठ रहे कई बड़े सवाल…
इस पूरे घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं —
- क्या प्रभावित परिवारों को पर्याप्त समय दिया गया था?
- क्या प्रशासनिक कार्रवाई पूरी तरह नियमानुसार हुई?
- क्या न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद कार्रवाई उचित थी?
- और क्या प्रशासन वास्तव में राजनीतिक दबाव में काम कर रहा था?
फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में बहस तेज हो गई है और प्रभावित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं।



