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विश्व तंबाकू निषेध दिवस: युवा उम्र में बढ़ रहा कैंसर और फेफड़ों की बीमारियों का खतरा, विशेषज्ञों नें दी चेतावनी

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विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026 की थीम- “तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश”

30-40 वर्ष की उम्र में तेजी से बढ़ रहे तंबाकूजनित कैंसर और फेफड़ों के रोग…

देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े, समय रहते छोड़ने पर जोखिम कम किया जा सकता है…

रायपुर, छत्तीसगढ़। 30 मई 2026

विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) के अवसर पर रायपुर स्थित रामकृष्णा केयर अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने युवाओं में बढ़ते तंबाकू सेवन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब 30 से 40 वर्ष आयु वर्ग के लोगों में भी तंबाकू सेवन से जुड़ी गंभीर फेफड़ों की बीमारियां और कैंसर के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।

इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम “तंबाकू और निकोटीन के आकर्षण का पर्दाफाश” निर्धारित की गई है। इस अभियान का उद्देश्य युवाओं को आकर्षित करने के लिए तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की मार्केटिंग में अपनाई जा रही रणनीतियों, जैसे फ्लेवर्ड उत्पाद, ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच, आकर्षक पैकेजिंग और डिजिटल प्रचार के प्रति जागरूक करना है।

विशेषज्ञों के अनुसार मध्य भारत में धूम्रपान तथा बिना धुएं वाले तंबाकू उत्पादों का उपयोग अब भी व्यापक रूप से किया जा रहा है। देश में लगभग 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं और हर वर्ष 13 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है।

रामकृष्णा केयर अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रवि जायसवाल ने बताया कि अधिकांश लोग यह मानते हैं कि धूम्रपान केवल फेफड़ों के कैंसर का कारण बनता है, जबकि तंबाकू का प्रभाव शरीर के कई अंगों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सिगरेट के धुएं में 7,000 से अधिक रसायन पाए जाते हैं, जिनमें कम से कम 69 ऐसे तत्व हैं जो कैंसर उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार हैं।

उन्होंने बताया कि तंबाकू का सीधा संबंध मुंह, गले, स्वरयंत्र, फेफड़े, भोजन नली, पेट, लिवर, अग्न्याशय, बड़ी आंत, किडनी, मूत्राशय, गर्भाशय ग्रीवा तथा कुछ रक्त संबंधी कैंसरों से भी है। देश में होने वाले लगभग एक-तिहाई कैंसर तंबाकू सेवन से जुड़े हैं। उन्होंने लोगों से लगातार खांसी, बलगम में खून, वजन घटना, मुंह के घाव, आवाज में बदलाव तथा निगलने में कठिनाई जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की।

सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. सुशील जैन ने कहा कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में युवा लगातार खांसी, सांस फूलना, फेफड़ों की क्षमता में कमी, अस्थमा और शुरुआती क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को अक्सर लगता है कि तंबाकू का दुष्प्रभाव कई वर्षों बाद दिखाई देता है, जबकि इसका नुकसान सेवन शुरू होने के कुछ समय बाद ही शरीर पर असर डालना शुरू कर देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 5.5 करोड़ से अधिक लोग सीओपीडी से प्रभावित हैं, जिसमें धूम्रपान प्रमुख कारणों में से एक है।

सीनियर कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. गिरीश अग्रवाल ने कहा कि ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और फ्लेवर्ड वेपिंग डिवाइस को अक्सर सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन इनसे निकोटीन की लत, फेफड़ों में सूजन तथा दीर्घकालिक फेफड़ों की क्षति का खतरा बना रहता है।

चिकित्सकों ने निष्क्रिय धूम्रपान (सेकेंड हैंड स्मोक) के खतरों पर भी विशेष जोर दिया। उनके अनुसार घर में धूम्रपान करने से बच्चों और बुजुर्गों में श्वसन संक्रमण, अस्थमा, हृदय रोग और फेफड़ों के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण भारत को प्रतिवर्ष 1.7 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, जो स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और उत्पादकता में कमी के रूप में सामने आता है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर चिकित्सकों ने लोगों से तंबाकू छोड़ने का संकल्प लेने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सहायता प्राप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि काउंसलिंग, व्यवहारिक थेरेपी, निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी तथा चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से तंबाकू की लत पर प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाया जा सकता है।

डॉ. गिरीश अग्रवाल ने कहा कि यह धारणा गलत है कि तंबाकू केवल सेवन करने वाले व्यक्ति को ही नुकसान पहुंचाता है। इसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, स्वास्थ्य व्यवस्था और देश की अर्थव्यवस्था तक पड़ता है। सही मार्गदर्शन, दृढ़ इच्छाशक्ति और चिकित्सा सहायता के साथ तंबाकू छोड़ना पूरी तरह संभव है।

विश्व तंबाकू निषेध दिवस का संदेश स्पष्ट है- तंबाकू और निकोटीन उत्पादों के आकर्षण के पीछे छिपे खतरों को पहचानें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और स्वयं के साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रखें।

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

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