विश्व जनसंख्या दिवस पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश खिलावन राम रिगरी ने विद्यार्थियों को किया जागरूक
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परिवार नियोजन, कानूनी अधिकार, पॉक्सो अधिनियम और साइबर सुरक्षा पर दी महत्वपूर्ण जानकारी…
कोण्डगांव, छत्तीसगढ़। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, बिलासपुर तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव के निर्देशन में स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल, कोंडागांव में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कोंडागांव श्री खिलावन राम रिगरी ने की। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को विश्व जनसंख्या दिवस के महत्व, बढ़ती जनसंख्या के सामाजिक, स्वास्थ्य एवं कानूनी प्रभावों तथा परिवार नियोजन, लैंगिक समानता, शिक्षा और सतत विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार तथा समाज में जनसंख्या संतुलन, स्वास्थ्य और शिक्षा के महत्व का संदेश प्रसारित करें। साथ ही विद्यार्थियों को उनके संवैधानिक अधिकार एवं कर्तव्यों, शिक्षा का अधिकार, मोटरयान अधिनियम, बाल विवाह निषेध, महिला एवं बाल अधिकार, बाल संरक्षण कानून तथा निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गईं।
कार्यक्रम के दौरान अपर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश श्री विक्रम प्रताप चंद्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती रेशमा बैरागी पटेल, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सुश्री गायत्री साय, प्रतिधारक अधिवक्ता सुरेंद्र भट्ट, विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षकगण एवं अधिकार मित्र भी उपस्थित रहे।

✒️ पॉक्सो अधिनियम और साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर…
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पॉक्सो (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून बच्चों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के लिए बनाया गया है। न्यायाधीशगण ने विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच की पहचान करने, किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में बिना भय के अपने माता-पिता, शिक्षक, विश्वसनीय अभिभावक अथवा पुलिस को तत्काल सूचना देने के लिए प्रेरित किया।
इसके साथ ही विद्यार्थियों को साइबर माध्यमों से होने वाले लैंगिक अपराधों, ऑनलाइन सुरक्षा, बाल अधिकारों तथा सुरक्षित वातावरण के महत्व के प्रति भी जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में कानून अत्यंत कठोर है।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने जागरूकता संबंधी विषयों पर रुचि दिखाई तथा समाज में कानूनी जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया।




