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एस.ई.सी.एल. गेवरा की ब्लास्टिंग से दहशत में ग्राम नराईबोध, घरों पर गिरे पत्थर; ग्रामीणों नें दी महाघेराव की चेतावनी

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गेवरा/कोरबा। एसईसीएल गेवरा परियोजना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने खदान में हो रही भारी ब्लास्टिंग से जान-माल को खतरा होने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार हो रहे विस्फोटों के कारण मकानों में दरारें आ रही हैं, घरों पर पत्थर गिर रहे हैं तथा लोग भय के माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उन्होंने विस्थापन, रोजगार, मुआवजा और सुरक्षा संबंधी लंबित मांगों का शीघ्र समाधान नहीं होने पर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का महाघेराव करने की चेतावनी दी है।

✒️ ब्लास्टिंग से घर में गिरा पत्थर, बड़ा हादसा टला…

ग्रामीणों के अनुसार हाल ही में ब्लास्टिंग के दौरान उड़कर आया एक बड़ा पत्थर एक मकान की एस्बेस्टस शीट को तोड़ते हुए सीधे कमरे के भीतर जा गिरा। उस समय परिवार के सदस्य कमरे में मौजूद थे, लेकिन संयोगवश कोई हताहत नहीं हुआ। पीड़ित परिवार का कहना है कि अगले दिन शीट की मरम्मत के दौरान दोबारा ब्लास्टिंग हुई और उसी स्थान पर फिर एक पत्थर आ गिरा। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है।

ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार हो रही ब्लास्टिंग से कई मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं। वहीं, बोरवेल और कुओं के प्रभावित होने से पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है।

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“शीट के बदले शीट दे देंगे, लेकिन जान का क्या?”

घटना की जानकारी मिलने पर एसईसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और क्षतिग्रस्त शीट बदलने तथा नुकसान की भरपाई का आश्वासन दिया। इस पर पीड़ित परिवार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “शीट के बदले शीट तो मिल जाएगी, लेकिन यदि इस हादसे में किसी की जान चली जाती तो उसकी भरपाई कौन करता?” ग्रामीणों ने सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

✒️ रोजगार और विस्थापन को लेकर भी नाराजगी…

ग्रामीणों का आरोप है कि पात्र प्रभावित परिवारों को रोजगार देने में प्रबंधन अनावश्यक विलंब कर रहा है। उनका कहना है कि नियमानुसार पात्र होने के बावजूद कुछ परिवारों के सदस्यों को अब तक नौकरी नहीं मिली है और उनकी फाइलें लंबित रखी गई हैं।

विस्थापन और पुनर्वास को लेकर भी ग्रामीणों ने असंतोष जताया। उनका आरोप है कि बसाहट स्थल पर विकास कार्यों के दावे किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। इससे सर्वे और पुनर्वास की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।

✒️ महाघेराव की चेतावनी…

ग्रामीणों ने बताया कि विस्थापन, रोजगार, मुआवजा और अन्य मांगों को लेकर पहले भी त्रिपक्षीय बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो समस्त ग्रामवासी एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का महाघेराव करेंगे।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान यदि किसी प्रकार की जनहानि, धनहानि या कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो इसकी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन की होगी।

नोट: यह समाचार ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके पक्ष पर आधारित है। एसईसीएल प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समाचार में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि संतुलित रिपोर्टिंग सुनिश्चित हो सके।

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

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