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विश्वविख्यात पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का निधन, लोककला जगत को अपूरणीय क्षति

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रिपोर्ट | रायपुर

रविवार, 5 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को अपनी सशक्त आवाज़ और अद्वितीय पंडवानी गायन शैली के माध्यम से विश्वभर में नई पहचान दिलाने वाली विश्वविख्यात लोकगायिका पद्म विभूषण तीजन बाई का रविवार, 5 जुलाई 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश के कला, साहित्य और संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। वे 69 वर्ष की थीं।

तीजन बाई ने पंडवानी जैसी पारंपरिक लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाकर भारतीय संस्कृति का गौरव बढ़ाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी ओजस्वी व प्रभावशाली प्रस्तुति से जन-जन तक पहुँचाया। उनकी कला ने न केवल देश बल्कि विदेशों में भी छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को नई पहचान दिलाई।

दुर्ग जिले के गनियारी गांव से निकलकर उन्होंने कठिन संघर्षों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई। समाज की अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए उन्होंने अपनी प्रतिभा और समर्पण के बल पर लोककला के क्षेत्र में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। कला के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

भारतीय लोककला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त हुए।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री सहित अनेक जनप्रतिनिधियों, कलाकारों, साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि तीजन बाई का जाना भारतीय लोकसंस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत है। उनकी आवाज़, उनकी कला और उनकी विरासत सदैव अमर रहेगी।

तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय लोककला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आने वाली पीढ़ियाँ उन्हें पंडवानी की अमर स्वर-साधिका के रूप में सदैव याद रखेंगी।

🙏💐विनम्र श्रद्धांजलि💐🙏

तीजन बाई जी (08 अगस्त 1956 – 05 जुलाई 2026)*

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