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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र समर्पण हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा: उप-मुख्यमंत्री अरुण साव

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अनुच्छेद 370 हटाने, सीएए लागू करने और नई शिक्षा नीति को बताया डॉ. मुखर्जी के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि

बिलासपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का राष्ट्र समर्पण, त्याग और दूरदर्शी नेतृत्व प्रत्येक पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक राजनीतिक कारणों से डॉ. मुखर्जी के अतुलनीय योगदान को भुलाने का प्रयास किया गया, जबकि उन्होंने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

उप मुख्यमंत्री मंगलवार को अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित व्याख्यानमाला (छात्र सम्मेलन) को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी बचपन से ही राष्ट्रभक्ति, भारतीय संस्कृति और शिक्षा के प्रति समर्पित थे। कम आयु में ही उन्होंने एक विद्वान शिक्षाविद् के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा को नई दिशा दी और देशहित को सदैव सर्वोपरि रखा।

उप-मुख्यमंत्री साव ने कहा कि देश के विभाजन के दौरान डॉ. मुखर्जी ने प्रताड़ित एवं विस्थापित हिंदू परिवारों के अधिकारों की मजबूती से आवाज उठाई। उन्होंने संयुक्त बंगाल के प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके परिणामस्वरूप आज पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना हुआ है। उन्होंने भारतीय भाषाओं, संस्कृति और परंपराओं पर आधारित शिक्षा व्यवस्था की परिकल्पना की थी, जिसे आज नई शिक्षा नीति के माध्यम से साकार किया गया है।

उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अनुच्छेद 370 तथा जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट प्रथा का खुलकर विरोध किया था। उनका स्पष्ट संदेश था कि “एक देश में दो प्रधान, दो विधान और दो निशान नहीं चलेंगे।” इसी संकल्प के साथ वे बिना परमिट कश्मीर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर जेल में रखा गया। पर्याप्त उपचार नहीं मिलने के कारण उनका निधन हो गया। उनका बलिदान भारत की एकता और अखंडता के इतिहास में सदैव अमर रहेगा।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण रूप से भारतीय संविधान की मुख्यधारा से जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू कर पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी एवं ईसाई समुदाय के पात्र शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि ये निर्णय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारों और उनके संघर्ष को सच्ची श्रद्धांजलि हैं।

उप-मुख्यमंत्री साव ने कहा कि आज भारत आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के जिस पथ पर आगे बढ़ रहा है, उसकी मजबूत नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे महान राष्ट्रनायकों ने रखी थी। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे राष्ट्रप्रेम, त्याग और समर्पण की भावना से प्रेरित होकर विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ललित प्रकाश पटैरिया, अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, भाजपा शहर जिला अध्यक्ष दीपक सिंह, भाजपा ग्रामीण जिला अध्यक्ष मोहित जायसवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नगर संघचालक प्रदीप शर्मा, ब्रजेंद्र शुक्ला, प्रफुल्ल शर्मा, विनोद तिवारी, कुलसचिव डॉ. तारणीश गौतम, भाजपा पदाधिकारी, विश्वविद्यालय के प्राध्यापक तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

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