विश्व क्षय रोग दिवस पर जागरूकता का संदेश, निःशुल्क जांच व परामर्श में छूट
डॉ. दिपेश मास्के बोले—समय पर इलाज से टीबी पूरी तरह ठीक संभव

रायपुर, 24 मार्च 2026।
विश्व क्षय रोग दिवस के अवसर पर तपेदिक (टीबी) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर एमएमआई नारायण मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, रायपुर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. दिपेश मास्के ने बताया कि टीबी आज भी एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, लेकिन समय पर जांच और उचित उपचार से इसे पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
अस्पताल द्वारा इस अवसर पर आम जनता के लिए निःशुल्क चेस्ट एक्स-रे सेवा एवं परामर्श पर 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की गई, ताकि लोग समय रहते जांच कराकर उपचार शुरू कर सकें।
डॉ. मास्के ने बताया कि टीबी Mycobacterium tuberculosis नामक जीवाणु से फैलने वाली बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से हवा के माध्यम से फैलती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, बुखार, रात में पसीना, वजन कम होना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत जांच करानी चाहिए। समय पर पहचान और उपचार से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।
भारत में टीबी के बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार द्वारा राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाना है। इसके तहत निःशुल्क जांच, दवाएं और मरीजों को पोषण सहायता जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
डॉ. मास्के ने यह भी बताया कि मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट टीबी (MDR-TB) एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है, जो अधूरे या गलत इलाज के कारण होती है। ऐसे में मरीजों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेना बेहद जरूरी है।
उन्होंने टीबी से बचाव के लिए खांसते-छींकते समय मुंह ढकने, घरों में वेंटिलेशन बनाए रखने और लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराने की अपील की। साथ ही समाज से टीबी मरीजों के प्रति भेदभाव खत्म करने का भी आग्रह किया।
अंत में उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। सामूहिक प्रयास, जागरूकता और सही इलाज के जरिए ही एक क्षय-मुक्त भारत का निर्माण संभव है।


