तालाब गहरीकरन के आड़ में मुरूम माफिया का खेल : प्रशासन मौन ।

शैलेश सिंह राजपूत/ ब्यूरो चीफ
तिल्दा-नेवरा। ग्राम गुजरा में इन दिनों विकास के नाम पर संसाधनों की खुली लूट का खेल चल रहा है। तालाब गहरीकरण का बहाना बनाकर जिस तरह बड़े पैमाने पर मुरूम उत्खनन किया जा रहा है, उसने प्रशासनिक व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तिल्दा-नेवरा क्षेत्र पहले ही अवैध उत्खनन के मामलों को लेकर चर्चा में रहा है, लेकिन इस बार मामला और भी अधिक चौंकाने वाला है, क्योंकि इसमें कथित तौर पर स्थानीय प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से लगातार मुरूम की खुदाई और उसकी खुलेआम बिक्री जारी है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे मामले को तालाब गहरीकरण जैसे जनहित कार्य की आड़ में अंजाम दिया जा रहा है। सरपंच पुत्र द्वारा तहसीलदार और एसडीएम से अनुमति होने का दावा किया जा रहा है, साथ ही ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित होने की बात भी कही जा रही है। लेकिन जब पंचायत सचिव से जानकारी ली गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी भी प्रकार की प्रक्रिया या प्रस्ताव से अनभिज्ञता जताई।
यहीं से पूरा मामला संदेह के घेरे में आ जाता है। बिना पंचायत की आधिकारिक कार्यवाही के ग्राम सभा का प्रस्ताव कैसे पारित हो सकता है? और यदि उत्खनन वैध है, तो निकाली गई मुरूम की रायल्टी क्यों नहीं काटी जा रही? यह स्पष्ट संकेत है कि कहीं न कहीं नियमों की अनदेखी कर निजी लाभ को प्राथमिकता दी जा रही है।
सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है? प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता इस पूरे घटनाक्रम को और संदिग्ध बना रही है। यदि समय रहते इस पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि व्यवस्था पर आमजन का भरोसा भी कमजोर करेगा।


