रायपुर

प्रारंभिक चरण में कैंसर का इलाज कम आक्रामक क्यों होता है? जानिए इसके फायदे
डॉ. अखिलेश साहू



रायपुर में डॉ. अखिलेश साहू ने जानकारी देते हुवे बताया कि  कैंसर कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई प्रकार की बीमारियों का समूह है, जिसका उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि इसका पता किस चरण में चला है। कैंसर का नाम सुनते ही सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी कठिन उपचार प्रक्रियाओं का डर मन में बैठ जाता है। लेकिन यदि कैंसर का पता शुरुआती अवस्था में चल जाए, तो इसका इलाज अक्सर कम आक्रामक, अधिक प्रभावी और शरीर पर कम बोझ डालने वाला होता है।
क्या होता है प्रारंभिक चरण का कैंसर?
प्रारंभिक चरण का कैंसर वह होता है जो अपने मूल अंग तक सीमित रहता है और शरीर के अन्य हिस्सों या लसीका ग्रंथियों तक नहीं फैलता। इस अवस्था में ट्यूमर छोटा होता है और उपचार के प्रति अधिक संवेदनशील होता है। इसी कारण डॉक्टर व्यापक उपचार की बजाय लक्षित और सीमित उपचार पर ध्यान दे सकते हैं।
सीमित सर्जरी की संभावना
शुरुआती चरण में ट्यूमर छोटा होने के कारण इसे आसपास के स्वस्थ ऊतकों को बचाते हुए सटीक रूप से हटाया जा सकता है। इससे बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता कम हो जाती है और कई मामलों में अंगों को सुरक्षित रखते हुए उपचार संभव होता है।
ऐसी सर्जरी से दर्द कम होता है, रिकवरी जल्दी होती है और जटिलताओं का खतरा भी कम रहता है।
कीमोथेरेपी और रेडिएशन की जरूरत कम
जब कैंसर फैलने का खतरा अधिक होता है, तब कीमोथेरेपी और रेडिएशन जैसी आक्रामक चिकित्सा पद्धतियों की आवश्यकता पड़ती है। लेकिन शुरुआती चरण में सर्जरी के बाद कैंसर के बचने की संभावना कम होती है, जिससे कई मरीजों को इन उपचारों से बचाया जा सकता है या कम अवधि और कम खुराक में उपचार दिया जाता है।
बेहतर जीवन गुणवत्ता
कम आक्रामक उपचार से मरीज की सामान्य दिनचर्या जल्दी बहाल होती है। शारीरिक और मानसिक रूप से रिकवरी तेज होती है तथा उपचार से जुड़ी जटिलताएँ कम होती हैं। यह विशेष रूप से बुजुर्गों, कामकाजी लोगों और पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है।
दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का कम जोखिम
आक्रामक कैंसर उपचार कभी-कभी तंत्रिका क्षति, हृदय समस्याएं, हार्मोनल बदलाव या प्रजनन संबंधी दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं। कम गहन उपचार से इन दीर्घकालिक जोखिमों की संभावना भी काफी कम हो जाती है।
उपचार के अधिक विकल्प उपलब्ध
कैंसर का जल्दी पता चलने पर डॉक्टरों के पास व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार उपचार तय करने के अधिक विकल्प होते हैं, जैसे न्यूनतम चीर-फाड़ वाली सर्जरी, लक्षित थेरेपी या कुछ मामलों में सक्रिय निगरानी। उन्नत अवस्था में विकल्प सीमित हो जाते हैं और अधिक आक्रामक उपचार की आवश्यकता पड़ती है।
स्क्रीनिंग की महत्वपूर्ण भूमिका
अधिकांश कैंसर शुरुआती चरण में लक्षण नहीं दिखाते, इसलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है। मैमोग्राफी, पैप स्मीयर, कोलोनोस्कोपी और अन्य स्क्रीनिंग परीक्षण कैंसर का समय रहते पता लगाने में मदद करते हैं, जिससे जटिल इलाज की जगह सरल और प्रभावी उपचार संभव हो पाता है।
निष्कर्ष:
कैंसर का जल्दी पता लगना उपचार को आसान, सुरक्षित और अधिक प्रभावी बनाता है। नियमित जांच और जागरूकता से न केवल जीवन बचाया जा सकता है, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता भी सुनिश्चित की जा सकती है।

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