रायपुर

*बजट ने राज्य की जनता को निराश किया – सुशील आनंद शुक्ला*



रायपुर/ प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बजट ने राज्य की जनता को निराश किया। बजट में रोजगार, शिक्षा, कृषि उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कुछ नहीं है। वित्त मंत्री जब बजट प्रस्तुत कर रहे थे तो उसमें केवल मोदी की चाटुकारिता अधिक दिखी। राज्य के वित्त मंत्री केंद्रीय योजनाओं, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल परियोजना का श्रेय ले लिया। सरकार का कोई भी ठोस विजन बजट में नहीं दिखा।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि 1 लाख 72 हजार करोड़ का बजट में नये रोजगार के अवसर तथा राज्य के सर्वहारा वर्ग के लिए कुछ भी नहीं है। 500 मोबाईल टावर लगाने की घोषणा की गयी, इसका मतलब इस बजट में भी भाजपा ने अपने उद्योगपति मित्रों के फायदे का पूरा ध्यान रखा। सीएम बस योजना के लिए मात्र 10 करोड़ का प्रावधान बताता है कि सरकार अपनी इस योजना के लिए गंभीर नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बस्तर के विकास के लिए बड़ी-बड़ी बाते करने के बाद भी बस्तर विकास प्राधिकरण के लिए 50 करोड़ का प्रावधान कर वित्त मंत्री ने बता दिया कि उनका बजट भाषण सिर्फ झूठ का पुलिंदा है। न सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए कुछ था और न ही कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिऐ कोई ठोस प्रावधान है।

प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि राजधानी रायपुर में फ्लाईओवर के लिए जो बजट प्रावधान किया गया है वह अपर्याप्त है, केवल सब्जबाग दिखाने वाला है। बजट में राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के लिए भी कुछ खास नहीं है, मात्र 64 करोड़ का राशि में वित्त मंत्री राजधानी क्षेत्र के विकास की बात कर रहे है। आयुष्मान भारत के लिए वित्त मंत्री ने मात्र 1500 करोड़ का प्रावधान किया है जबकि इतनी राशि तो अभी सरकार को अस्पतालों की उधारी देनी है, आने वाले वर्ष में भी फिर आयुष्मान से इलाज में परेशानी आने वाली है। वित्त मंत्री रेल और जहाज के विस्तार की बातें कर जनता में भ्रम फैलाने की बात कर रहे है। मात्र 30 करोड़ में प्रदेश में अनेकों एयरपोर्ट के विकास की बात कर रहे थे। हवाई अड्डों के उन्नयन के नाम पर केवल शराब दुकाने खुलेंगी। साय सरकार के पिछले दो बजट के समान ही तीसरे बजट से भी जनता निराश हुई। वित्त मंत्री राज्य की जनता के विकास की ललक पैदा कर पाने में असफल साबित हो गये।

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