CHHATTISGARHnewsraipur

साइबर ठगी पर शिकंजा कसने की तैयारी, 300 पुलिस अधिकारियों को आधुनिक जांच तकनीकों का प्रशिक्षण

📡36garhnewsupdate.com

रायपुर, 8 सितंबर 2026

साइबर और डिजिटल माध्यमों से बढ़ रहे वित्तीय अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपनी जांच और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। रायपुर के विमतारा सभागार में ‘न्यू ऐज फिनांसियल क्राइम्स एंड रिस्पॉन्स रेडनेस’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से करीब 300 पुलिस अधिकारी और विवेचक शामिल हुए।

कार्यशाला में अधिकारियों को ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराध, म्यूल बैंक खाते, यूपीआई फ्रॉड, क्यूआर कोड ठगी, इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, फर्जी पहचान और रिमोट डिवाइस कंट्रोल जैसे आधुनिक साइबर अपराधों की जांच के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

साइबर अपराध की बदलती तकनीकों पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

कार्यशाला में साइबर विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने अधिकारियों को साइबर एवं वित्तीय अपराधों के बदलते स्वरूप और आधुनिक जांच तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण, डिजिटल फुटप्रिंट की पहचान और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर अपराधियों तक पहुंचने की प्रक्रिया को उदाहरणों के माध्यम से समझाया।

ठगी के बाद शुरुआती समय को बताया सबसे अहम

वित्तीय साइबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। शिकायत मिलते ही संदिग्ध लेन-देन की पहचान, संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थाओं से समन्वय तथा ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया।

म्यूल खातों से अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने की तकनीक

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को यह भी बताया गया कि पीड़ित के खाते से शुरू होकर रकम किन-किन बैंक खातों और म्यूल अकाउंट से गुजरती है, इसकी कड़ी जोड़कर अंतिम लाभार्थी और पूरे अपराधी नेटवर्क तक कैसे पहुंचा जा सकता है। वास्तविक मामलों पर आधारित केस स्टडी के जरिए डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण और वैज्ञानिक विवेचना की प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यशाला में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न जिलों से पहुंचे पुलिस अधिकारियों और विवेचकों ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान सामने आने वाली चुनौतियां साझा कीं। विशेषज्ञों ने इन समस्याओं के समाधान और आधुनिक तकनीकों के प्रभावी इस्तेमाल को लेकर मार्गदर्शन दिया।

कार्यशाला में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, महानिदेशक प्रशिक्षण जी.पी. सिंह, एडीजी दीपांशु काबरा, एडीजी अमित कुमार, एडीजी डॉ. आनंद छाबड़ा, आईजी प्रशांत अग्रवाल, डीआईजी सुजीत कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक पल्लव सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।

इस पहल का उद्देश्य साइबर वित्तीय अपराधों में त्वरित कार्रवाई, डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण और अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की पुलिस की क्षमता को और मजबूत करना है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest