छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश निर्माण कार्यशाला में प्रदेश के तीन भाषाविद एवं साहित्यकार शामिल
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डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ और विजय मिश्रा ‘अमित’ कर रहे छत्तीसगढ़ी लोक शब्दों के संकलन एवं संवर्धन में योगदान
रायपुर ,27/08/2026
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा में छत्तीसगढ़ी-हिंदी लोक शब्दकोश का निर्माण किया जा रहा है। लोक शब्दकोश निर्माण परियोजना के अंतर्गत 24 से 28 अगस्त 2026 तक आगरा में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के तीन भाषाविद एवं साहित्यकार डॉ. सुधीर शर्मा, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ और विजय मिश्रा ‘अमित’ शामिल हुए हैं।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. हरिशंकर ने तीनों विशेषज्ञों का अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर संस्थान के प्रो. जोगेंद्र सिंह मीणा, परियोजना प्रभारी डॉ. अरिमर्दन त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष प्रो. सपना गुप्ता, डॉ. मीनाक्षी दुबे तथा कोशकर्मी आकाश भगत और सुष्मिता बारिक उपस्थित रहे।
पांच दिवसीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ी लोक शब्दों को आईपीए (इंटरनेशनल फोनेटिक अल्फाबेट) में दर्ज करने का कार्य किया जा रहा है। डॉ. सुधीर शर्मा के संपादन में डॉ. माणिक विश्वकर्मा और विजय मिश्रा इस कार्य में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कार्यशाला के दौरान पूर्व में संकलित छत्तीसगढ़ी शब्दों की जांच एवं उनका परिवर्धन करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी शब्दों के समानार्थी अंग्रेजी शब्दों को भी जोड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा छत्तीसगढ़ी भाषा के शब्दकोश का निर्माण राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे छत्तीसगढ़ी भाषा के लोक शब्दों को व्यवस्थित रूप से संकलित और संरक्षित करने के साथ देशभर में भाषा के अध्ययन एवं समझ को बढ़ावा मिलेगा। यह शब्दकोश शोधार्थियों, साहित्यकारों और भाषाविदों के लिए भी उपयोगी संदर्भ सामग्री के रूप में महत्वपूर्ण साबित होगा।
निर्माणाधीन शब्दकोश में अधिकाधिक छत्तीसगढ़ी लोक शब्दों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यही इसकी प्रमुख विशेषताओं में से एक है। इस दृष्टि से यह शब्दकोश पूर्व में प्रकाशित छत्तीसगढ़ी शब्दकोशों से अलग और व्यापक स्वरूप वाला माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और अकादमिक अध्ययन की दिशा में इसे महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।


