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शिक्षा-स्वास्थ्य के लिए जनप्रतिनिधियों को जागना होगा, कोसीर में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की घोषणा अब तक अधूरी

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स्थायी चिकित्सक के अभाव से जूझ रहा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, डेढ़ वर्ष बाद भी उन्नयन की घोषणा पर अमल का इंतजार

वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे

सारंगढ़। 26/08/2026

अमृतकाल के दौर में विकास के दावों के बावजूद कोसीर गांव में शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई मूलभूत समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। ऐतिहासिक महत्व रखने वाले कोसीर में वर्षों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग उठती रही है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी चिकित्सक की कमी आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। वहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन की घोषणा के डेढ़ वर्ष बाद भी धरातल पर इसका इंतजार जारी है।

कोसीर में शिक्षा का इतिहास आजादी से पहले का है। वर्ष 1904 में यहां प्राथमिक विद्यालय की शुरुआत हो चुकी थी। बाद में माध्यमिक शिक्षा के विस्तार में ग्रामीणों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। बताया जाता है कि किसान परिवार से जुड़े दादा मुन्ना दास ने विद्यालय निर्माण के लिए अपनी जमीन तक बेचकर सहयोग किया था। इसके बावजूद पिछले करीब 20 वर्षों से नवीन महाविद्यालय की मांग पूरी नहीं हो सकी है।

1960 के दशक में शुरू हुई स्वास्थ्य सुविधा

स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो 1960 के दशक से पहले ग्रामीणों को उपचार के लिए सरसिवां जाना पड़ता था। इसके बाद कोसीर में स्वास्थ्य विभाग ने किराए के भवन में उप स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया। उस दौर में आयुर्वेद चिकित्सकों के साथ कई चिकित्सकों ने यहां सेवाएं दीं। इनमें डॉ. चिंचोलकर, डॉ. खंडेलवाल और डॉ. एम.के. गुप्ता सहित अन्य चिकित्सकों का नाम ग्रामीण बताते हैं।

करीब 1985 के आसपास डॉ. विजय आनंद कोसरिया, डॉ. परदेशी, बी.के. चंद्रवंशी, डॉ. एम.के. मनहर, डॉ. पुजारी तथा आरएमए अर्जुन ध्रुव सहित स्वास्थ्यकर्मियों ने यहां सेवाएं दीं। ग्रामीणों के अनुसार आरएमए अर्जुन ध्रुव के बाद से केंद्र में स्थायी चिकित्सक की व्यवस्था लगातार प्रभावित होती रही।

अस्थायी डॉक्टरों के भरोसे स्वास्थ्य केंद्र

वर्तमान व्यवस्था में अप्रैल 2026 में डॉ. गौरव साहू को कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की जिम्मेदारी दी गई थी। पीजी परीक्षा के कारण वे जुलाई से एक माह के अवकाश पर हैं। 15 अगस्त के बाद केंद्र में अनुबंधित चिकित्सकों के भरोसे स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हो रही हैं। डॉ. नेहा साहू और डॉ. चिन्मय पाणिग्रही अस्थायी रूप से स्वास्थ्य केंद्र की सेवाएं संभाल रहे हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सारंगढ़ विकासखंड के कोसीर और गोडम में निर्धारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वर्ष 2018 से कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सह आयुष केंद्र भी संचालित है। वहीं कोसीर में पदस्थ आरएमए को गोडम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब कोसीर का क्षेत्र स्वयं बड़ा है तो यहां पदस्थ स्वास्थ्यकर्मी को दूसरे केंद्र का अतिरिक्त दायित्व क्यों दिया गया है।

इसी तरह लैब टेक्नीशियन सप्ताह में केवल तीन दिन कोसीर में सेवाएं देते हैं, जबकि अन्य दिनों में उन्हें दूसरे स्थान की जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे जांच सुविधाएं भी प्रभावित होती हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद जगी थी उम्मीद

कोसीर के बौद्ध विहार में भगवान बुद्ध की प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी अपने मंत्रिमंडल के साथ पहुंचे थे। इस दौरान कोसीर में 10 बिस्तरों वाले चिकित्सालय के निर्माण और दो चिकित्सकों की सेवा की घोषणा की गई थी। कार्यक्रम में तत्कालीन शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता और नंदकुमार पटेल भी मौजूद थे।

बाद में 29 मई 2008 को तत्कालीन संसदीय सचिव देव लाल दुग्गा द्वारा सारंगढ़ में नए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवन का वर्चुअल लोकार्पण किया गया। हालांकि ग्रामीणों के अनुसार 10 बिस्तरों के अस्पताल की घोषणा के बावजूद यहां छह बिस्तरों की ही व्यवस्था हो सकी।

अब वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा 19 जनवरी 2025 को सारंगढ़ प्रवास के दौरान कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने की घोषणा की गई थी। घोषणा से क्षेत्रवासियों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद जगी, लेकिन डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी इसके क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

स्थायी डॉक्टर की मांग को लेकर दिया आवेदन

कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति की मांग को लेकर जनपद सदस्य हिरा भैरवनाथ जाटवर ने जिला चिकित्सा अधिकारी को पत्र देकर समस्या से अवगत कराया है। उनका कहना है कि कोसीर बड़ा क्षेत्र है और यहां एमबीबीएस चिकित्सक की स्थायी पदस्थापना आवश्यक है।

ग्रामीणों ने रखी अपनी बात

विष्णु चंद्रा, ग्रामीण:

“कोसीर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्थायी डॉक्टर जरूरी है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुलेगा तो पूरे अंचल के लोगों को लाभ मिलेगा।”

हिरा भैरवनाथ जाटवर, जनपद सदस्य:

“मेरे द्वारा आवेदन देकर स्थायी डॉक्टर की मांग की गई है। यह बड़ा क्षेत्र है, इसलिए यहां एमबीबीएस चिकित्सक की स्थायी व्यवस्था होना जरूरी है।”

सहदेव प्रसाद सुमन, सामाजिक कार्यकर्ता:

“पहले यहां डॉक्टर स्थायी रूप से पदस्थ रहते थे। अब स्थायी चिकित्सक का अभाव है। कोसीर में स्थायी डॉक्टर की आवश्यकता है।”

सवाल अब भी कायम

कोसीर जैसे बड़े और ऐतिहासिक गांव में वर्षों से स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की मांग के बावजूद स्थायी चिकित्सक की व्यवस्था नहीं होना गंभीर सवाल खड़े करता है। बार-बार चिकित्सकों के बदलने और अस्थायी व्यवस्था पर निर्भरता से ग्रामीणों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के उन्नयन की घोषणा कब धरातल पर उतरेगी, स्थायी चिकित्सक की नियुक्ति कब होगी और स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त कमियों का स्थायी समाधान कब निकलेगा—इन सवालों के जवाब का कोसीर सहित आसपास के ग्रामीण लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं।

 

 

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