सारंगढ़। बिलाईगढ़ में सरकारी नाले और ‘ग्राम सेवक’ भूमि पर भू-माफिया का हमला; अस्तित्व पर संकट

बिलाईगढ़। नगर पंचायत बिलाईगढ़ के वार्ड क्रमांक 10 में सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझने वाले अराजक तत्वों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने न केवल कीमती ‘ग्राम सेवक भूमि’ (खसरा नं. 1087) पर कब्जा किया है, बल्कि प्राकृतिक जल निकासी के स्रोत ‘नाला’ और उसके आसपास की सुरक्षित भूमि को भी अपनी चपेट में ले लिया है। प्रशासन द्वारा बार-बार दिए गए नोटिस और कानूनी चेतावनियों का इन अतिक्रमणकारियों पर कोई असर नहीं हो रहा है, जो सीधे तौर पर शासन की व्यवस्था को चुनौती है।
नाले की भूमि पर कब्जा: पर्यावरण और शहर के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों का मानना है कि नाले की भूमि पर कब्जा करना न केवल अवैध है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के लिए आत्मघाती कदम है:
जलभराव की समस्या: नाले के प्रवाह को बाधित करने से बारिश के दिनों में पूरे वार्ड और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है।
भू-जल स्तर पर प्रभाव: प्राकृतिक नाले जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) का मुख्य स्रोत होते हैं। इन पर पक्का निर्माण होने से भविष्य में जल संकट गहरा सकता है।
पारिस्थितिक संतुलन: नाले के किनारे की भूमि ‘ग्रीन बेल्ट’ की तरह कार्य करती है। यहाँ निर्माण होने से प्राकृतिक ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
प्रशासनिक सख्ती: ‘बुलडोजर’ और ‘कुर्की’ की तैयारी
नगर पंचायत प्रशासन ने अब ‘नरम रुख’ छोड़कर ‘कड़ा प्रहार’ करने की रणनीति बनाई है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) को प्रेषित पत्र के अनुसार:
तत्काल बेदखली: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत अतिक्रमणकारियों को बेदखल कर शासकीय भूमि को मुक्त कराया जाएगा।
अराजक तत्वों पर FIR: सरकारी काम में बाधा डालने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज करने हेतु पुलिस विभाग को पत्र लिखा गया है।
सेवाओं पर रोक: अवैध निर्माण स्थल पर बिजली और पानी के कनेक्शन काटने हेतु विभाग को कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
त्वरित कार्यवाही क्यों है जरूरी?
शासकीय भूमि, विशेषकर जो नाले से लगी हो, वह सार्वजनिक उपयोगिता (Public Utility) के लिए होती है। यदि आज इन अराजक तत्वों के खिलाफ कठोर मिसाल कायम नहीं की गई, तो भविष्य में सरकारी योजनाओं के लिए जमीन कम पड़ जाएगी और शहर का सुनियोजित विकास असंभव हो जाएगा। ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि नोटिस मिलने के बाद भी निर्माण कार्य को और तेज गति से किया जा रहा है, जो कि कानून का खुला उपहास है।
अंतिम चेतावनी
नगर पंचायत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमांकन के पश्चात 24 घंटे के भीतर यदि स्वयं कब्जा नहीं हटाया गया, तो प्रशासन अपने संसाधनों से अवैध ढांचों को जमींदोज कर देगा और इसका समस्त व्यय (Demolition Cost) भी संबंधित अतिक्रमणकारियों की निजी संपत्ति कुर्क करके वसूला जाएगा।


