हुनर के धागों से आत्मनिर्भरता की उड़ान, दिव्यांग महिलाओं और श्रवण बाधित छात्राओं ने बनाई राखियां
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रायपुर, 27 अगस्त 2026
रक्षाबंधन का पर्व इस बार रायपुर में दिव्यांग महिलाओं और श्रवण बाधित छात्राओं के लिए सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, हुनर और आत्मनिर्भरता का उत्सव बन गया है। समाज कल्याण विभाग से जुड़े केंद्रों में इन बहनों ने अपने हाथों से खूबसूरत राखियां तैयार कर यह संदेश दिया कि हुनर किसी शारीरिक चुनौती का मोहताज नहीं होता।

माना कैंप स्थित एकीकृत महिला सहायता केंद्र ‘अपराजिता’ में दिव्यांग महिलाओं को सुरक्षित आश्रय और चिकित्सा सुविधाओं के साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर यहां की हितग्राही महिलाओं ने आकर्षक राखियां तैयार की हैं। त्योहारों के माध्यम से उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का उद्देश्य उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
अपराजिता केंद्र में स्वस्थ होने के बाद कई महिलाओं का पुनर्वास भी किया गया है। इन महिलाओं को छत्तीसगढ़ के अलावा ऊटी, दिल्ली, तमिलनाडु, ओडिशा, कोलकाता, ओंकारेश्वर और फरीदाबाद जैसे विभिन्न स्थानों में पुनर्वासित किया जा चुका है।

वहीं मठपुरैना स्थित शासकीय दृष्टि एवं श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की श्रवण बाधित छात्राओं ने भी अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए सुंदर और आकर्षक राखियां तैयार की हैं। विद्यालय में छात्राओं को राखी बनाने के साथ-साथ पेंटिंग और सिलाई का प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
इन छात्राओं द्वारा तैयार की गई राखियां विभिन्न स्थानों पर भेजी जाती हैं। जब लोग उनकी बनाई राखियां खरीदते हैं, तो इससे छात्राओं का उत्साह बढ़ता है और उनमें आत्मनिर्भर बनने का विश्वास मजबूत होता है। छात्राओं ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लिए विशेष राखी भी तैयार की है।

हुनर को मिल रहा सम्मान
समाज कल्याण विभाग की यह पहल रक्षाबंधन के पर्व को एक सकारात्मक संदेश से जोड़ती है। राखी निर्माण जैसी गतिविधियां दिव्यांग महिलाओं और छात्राओं को केवल रचनात्मक मंच ही नहीं देतीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करती हैं।
इन बहनों के हाथों से बनी राखियों में सिर्फ रंग और धागे नहीं, बल्कि मेहनत, उम्मीद और आत्मनिर्भर भविष्य का संदेश भी जुड़ा है।



