साक्षात्कार: “यह सम्मान मेरे अग्रज संपादकों और पत्रकार साथियों का है” — लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’
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वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ से राजकुमार धर द्विवेदी की विशेष बातचीत
रायपुर। 22/08/2026
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ पिछले 26-27 वर्षों से पत्रकारिता और हिंदी काव्य सृजन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पत्रकारिता के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। रायपुर के साहित्यिक एवं सामाजिक मंच साहित्य सृजन संस्थान द्वारा 23 अगस्त को राजधानी के वृंदावन हॉल में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में उन्हें ‘श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाएगा। सम्मान से पहले वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार लक्ष्मीनारायण लहरे ‘साहिल’ से राजकुमार धर द्विवेदी ने विभिन्न विषयों पर बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश—
प्रश्न: लहरे जी, आपको ‘श्रेष्ठ पत्रकार सम्मान-2026’ के लिए चुना गया है। सबसे पहले आपको बहुत-बहुत बधाई। इस सम्मान को आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर: आपका बहुत आभार। मेरे लिए यह बेहद भावुक और गौरवपूर्ण क्षण है। मैं इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि के रूप में नहीं देखता। यह सम्मान मेरे अग्रज संपादकों और उन सभी पत्रकार साथियों का सम्मान है, जिन्होंने पिछले 26-27 वर्षों के मेरे पत्रकारिता सफर में मेरा साथ दिया और मेरी बात को पाठकों तक पहुंचाया। सारंगढ़, रायगढ़, रायपुर, बिलासपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों के उन सभी संपादकों का भी इसमें योगदान है, जिन्होंने मुझे पत्रकारिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने और सीखने का अवसर दिया। मैं हृदय से यह सम्मान अपने सभी अग्रजों और पत्रकार साथियों को समर्पित करता हूं।
प्रश्न: आपकी पत्रकारिता और साहित्य दोनों क्षेत्रों में लंबी यात्रा रही है। इस सफर को आप किस तरह याद करते हैं?
उत्तर: पत्रकारिता मेरे लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व है। मेरा प्रयास हमेशा एक सजग प्रहरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाने का रहा है। वहीं साहित्य मेरे लिए आत्मिक अभिव्यक्ति है। मैं ‘साहिल’ उपनाम से काव्य सृजन करता हूं। विभिन्न संस्थाओं द्वारा मुझे छत्तीसगढ़ काव्य रत्न, काव्य श्री, काव्य गौरव, साहित्य कला रत्न और दबंग हिंदी सेवा सम्मान जैसे सम्मान मिल चुके हैं, लेकिन मेरे लिए वास्तविक सम्मान उस समय होता है, जब किसी खबर के माध्यम से किसी जरूरतमंद को न्याय मिलता है या किसी कविता की पंक्तियां किसी व्यक्ति के हृदय को स्पर्श करती हैं।
प्रश्न: वर्तमान समय में पत्रकार और साहित्यकार की समाज एवं देश के प्रति क्या भूमिका होनी चाहिए?
उत्तर: दोनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पत्रकार को निष्पक्ष, निर्भीक और जनपक्षधर होना चाहिए। पत्रकारिता का उद्देश्य सत्ता की चाटुकारिता नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को सामने लाना होना चाहिए। आज के दौर में सच को सच कहना ही सबसे बड़ी पत्रकारिता है।
वहीं साहित्यकार समाज का पथ-प्रदर्शक होता है। साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और संवेदनाओं का संवाहक भी है। पत्रकारिता तथ्यों के माध्यम से समाज को जागरूक करती है तो साहित्य संवेदना के माध्यम से समाज को जोड़ता है। दोनों का उद्देश्य बेहतर समाज और बेहतर राष्ट्र के निर्माण में योगदान देना होना चाहिए। लेखनी के माध्यम से नैतिक चेतना जगाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
प्रश्न: 23 अगस्त को रायपुर में राष्ट्रीय स्तर का कवि सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। इस सम्मान ने आपको आगे के लिए किस तरह प्रेरित किया है?
उत्तर: मैं रायपुर साहित्य सृजन संस्थान के अध्यक्ष वीर अजीत शर्मा का हृदय से आभारी हूं, जिन्होंने मुझे इस आयोजन में आमंत्रित किया और सम्मान के लिए चयनित किया। ऐसे आयोजन साहित्य और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस सम्मान से मुझे सबसे बड़ी प्रेरणा यही मिली है कि अपनी सक्रियता को और बढ़ाना है। पत्रकार साथियों और साहित्यिक जगत से जो स्नेह और सम्मान मुझे मिल रहा है, वह मुझे और अधिक ईमानदारी एवं जिम्मेदारी के साथ काम करने की ऊर्जा देता है। मैं आगे भी पत्रकारिता और साहित्य, दोनों माध्यमों से समाज की सेवा के लिए निरंतर सक्रिय रहूंगा। यह सम्मान मेरे लिए उपलब्धि से अधिक एक नई जिम्मेदारी है।
प्रश्न: युवा पत्रकारों और नवोदित साहित्यकारों के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: युवाओं से मैं यही कहना चाहूंगा कि सफलता के लिए शॉर्टकट तलाशने के बजाय निरंतर मेहनत और अध्ययन पर विश्वास रखें। भाषा पर मजबूत पकड़ बनाएं, खूब पढ़ें और हमेशा जमीन से जुड़े रहें। पत्रकारिता में धैर्य और साहित्य में निरंतर अभ्यास ही व्यक्ति को स्थापित करता है। सम्मान अपने आप पीछे-पीछे आते हैं, लेकिन इसके लिए पहले साधना और ईमानदार प्रयास जरूरी है।
प्रश्न: अंत में, अपने पाठकों और पत्रकारिता-साहित्य से जुड़े साथियों के लिए आप क्या कहना चाहेंगे?
उत्तर: मैं अपने सभी पाठकों, पत्रकार साथियों, संपादकों और साहित्य प्रेमियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्षों में मुझे जो स्नेह और विश्वास मिला है, वही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। मेरी कोशिश रहेगी कि आने वाले समय में भी मेरी लेखनी समाज, साहित्य और पत्रकारिता के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभाती रहे।



