
रायपुर। 18/08/2026
स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर वक्ता मंच एवं जन एकता फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देशभक्ति की थीम पर आयोजित इस कवि सम्मेलन में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ एवं उत्तर प्रदेश के नवोदित और स्थापित कवियों ने अपनी रचनाओं की प्रभावी प्रस्तुति दी।
वक्ता मंच द्वारा प्रादेशिक स्तर से आगे बढ़कर अखिल भारतीय एवं अंतर्राष्ट्रीय क्षितिज पर साहित्यिक गतिविधियों के विस्तार की दिशा में इसे पहला महत्वपूर्ण कदम बताया गया। आयोजकों के अनुसार आगामी दिनों में साहित्यिक गतिविधियों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया जाएगा।
कवि सम्मेलन में महाराष्ट्र के पुणे से डॉ. सुरेखा सिद्धि खरे, महाराष्ट्र के सावनेर से अमन रंगेला, मध्य प्रदेश के भोपाल से उमाशंकर दुबे ‘मनमौजी’, उत्तर प्रदेश के लखनऊ से कुलदीप सिंह चंदेल तथा छत्तीसगढ़ के रायपुर से आशा साहू, राजकुमार धर द्विवेदी एवं छत्तीसगढ़ के कोसीर से लक्ष्मी नारायण लहरे सहित कवियों ने सहभागिता की। काव्य गोष्ठी का प्रभावी संचालन वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते ने किया।
देशभक्ति की रचनाओं ने बांधा समां
कवि सम्मेलन के दौरान कवियों ने देशभक्ति, संघर्ष, मातृभूमि, वीर सैनिकों के बलिदान और जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी कविताओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।
आशा साहू ‘आशा दीप’, रायपुर ने दो काव्य रचनाओं की प्रस्तुति दी। उन्होंने देशभक्ति गीत के माध्यम से मातृभूमि और तिरंगे के प्रति समर्पण की भावना व्यक्त की। उनकी प्रस्तुति में—
«“ऐ वतन मेरे वतन,
तुझ पर दिल कुर्बान,
तेरी मिट्टी से मेरा हिंदुस्तान,
तेरे तिरंगे की शान रहे आसमान।”»
गीत के साथ ही उन्होंने ‘देश के वीर प्रहरी’ शीर्षक से रचना प्रस्तुत करते हुए स्वतंत्रता संग्राम के वीरों और शहीदों के बलिदान को स्मरण किया। उन्होंने अपनी रचना में कहा कि जब-जब तिरंगा लहराता है, तब-तब उन वीरों की याद आती है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए। भगत सिंह सहित स्वतंत्रता संग्राम के अनेक सेनानियों के त्याग को याद करते हुए उन्होंने देशवासियों से वीरों की कुर्बानी को सदैव स्मरण करने का आह्वान किया।
राजकुमार धर द्विवेदी ने मातृभूमि की महिमा का वर्णन करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की—
«“अपनी माटी सोना-चांदी,
हीरा, मोती, चंदन है,
बारंबार नमन हे धरती,
पूजन, अर्चन, वंदन है।
अन्नदायिनी, भरण-पोषणी,
हे जननी अभिनंदन है!”»
उनकी कविता में मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता की भावना प्रमुख रही।
लक्ष्मी नारायण लहरे, कोसीर ने जीवन के संघर्षों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। उन्होंने कहा—
«“जिंदगी का सफर आसान कहाँ होता है,
सच कहें तो ये सबब होती है।
संघर्षों भरे पल में
कहाँ कोई साथ होता है?
सुख-दुख में इंसान अकेला ही होता है।”»
उन्होंने जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों का उल्लेख करते हुए आगे कहा कि जीवन का सफर बेहद मुश्किल होता है, जहां हर किसी का साथ लंबे समय तक नहीं मिल पाता। शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी रोजगार की चुनौती को रेखांकित करते हुए उन्होंने सामाजिक वास्तविकताओं को कविता के माध्यम से सामने रखा।
उमाशंकर दुबे ‘मनमौजी’, भोपाल ने अपनी ओजपूर्ण एवं हास्य-व्यंग्य शैली की रचना से कवि सम्मेलन में देशभक्ति का रंग भर दिया—
«“सेना में होऊँगा भरती,
कर दूँगा दुश्मन को टाइट।
फौजी बनकर यूं चलूंगा—
लेफ्टराइट-लेफ्टराइट।”»
उनकी प्रस्तुति ने श्रोताओं में उत्साह और देशभक्ति की भावना का संचार किया।

कवि सम्मेलन के दौरान वक्ता मंच के सचिव मनीष अवस्थी ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम के समापन अवसर पर जन एकता फाउंडेशन एवं वक्ता मंच की ओर से कार्यक्रम संयोजक शुभम साहू ने सभी कवियों, साहित्यप्रेमियों एवं सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सहयोग देने वाले सभी लोगों का धन्यवाद करते हुए कवि सम्मेलन के समापन की घोषणा की।
आयोजकों ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियों को व्यापक मंच प्रदान करने तथा देश के विभिन्न हिस्सों के रचनाकारों को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में ऐसे आयोजनों को आगे भी जारी रखा जाएगा।



