
📡 SECL चिरमिरी प्रबंधन की कार्रवाई को अवैध, मनमाना और अनुचित करार दिया; 02 जनवरी 1960 को सहीं जन्मतिथि माननें का आदेश, बैक-वेज सहित सभी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ देनें के निर्देश…
जबलपुर/चिरमिरी, छत्तीसगढ़। 17 अगस्त 2026
दक्षिण पूर्वी कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के चिरमिरी क्षेत्र में जन्मतिथि को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद में केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT), जबलपुर नें महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कामगार बारे लाल, सहायक फोरमैन, कुरासिया कोलियरी के पक्ष में अवार्ड पारित किया है, न्यायाधिकरण नें SECL चिरमिरी एरिया के प्रबंधन द्वारा कामगार की सहीं जन्मतिथि को सेवा अभिलेख में दर्ज नहीं करनें की कार्रवाई को “illegal, arbitrary and unjustified” (अवैध, मनमानी एवं अनुचित) करार दिया है।
प्रकरण क्रमांक CGIT/LC/R/51/2016 में पीठासीन अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव, H.J.S. (सेवानिवृत्त) नें 30 जून 2026 को यह महत्वपूर्ण अवार्ड पारित किया।
📡 स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को मिली मान्यता…
मामला कामगार बारे लाल की जन्मतिथि से संबंधित था, ट्रिब्यूनल के समक्ष मुख्य प्रश्न यह था कि क्या SECL चिरमिरी एरिया के महाप्रबंधक द्वारा School Transfer Certificate में दर्ज जन्मतिथि को Form ‘B’ Register में दर्ज नहीं करना उचित एवं न्यायसंगत था, और यदि नहीं, तो कामगार को किस प्रकार की राहत दी जानी चाहिए।
न्यायाधिकरण ने उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद 02 जनवरी 1960 को बारे लाल की सही जन्मतिथि माना।
📡 1983 में मेडिकल जांच के आधार पर दर्ज हुई थी दूसरी जन्मतिथि…
दस्तावेजों के अनुसार, बारे लाल की नियुक्ति SECL के चिरमिरी क्षेत्र में हुई थी, नियुक्ति से पूर्व 25 सितंबर 1983 को उनके मेडिकल परीक्षण के दौरान उनकी उम्र 26 वर्ष दर्ज की गई, इसी आधार पर सेवा रिकॉर्ड में उनकी जन्मतिथि 26 सितंबर 1957 दर्ज कर दी गई।
कामगार का पक्ष था कि रोजगार कार्यालय में पंजीयन के समय तथा नियुक्ति के दौरान उन्होंने अपना School Leaving/Transfer Certificate प्रस्तुत किया था, जिसमें उनकी जन्मतिथि 02 जनवरी 1960 दर्ज थी, इसके बावजूद मेडिकल जांच में दर्ज उम्र के आधार पर सेवा रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज कर दी गई।

📡 नौकरी के नौ वर्ष के भीतर ही कर दिया था सुधार का आवेदन…
मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि कामगार नें विवाद को सेवा के अंतिम समय में नहीं उठाया था, उन्होंने 17 अप्रैल 1992 को ही SECL प्रबंधन के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर अपनी जन्मतिथि सुधारनें का अनुरोध किया था।
न्यायाधिकरण नें इस आवेदन को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना, प्रबंधन कर्मचारी के इस दावे को प्रभावी रूप से खारिज नहीं कर सका कि वर्ष 1992 में उसका आवेदन प्राप्त हुआ था, इसके बावजूद प्रबंधन नें निर्धारित प्रक्रिया के तहत उस आवेदन पर निर्णय नहीं लिया।
इसी बिंदु पर न्यायाधिकरण नें प्रबंधन की कार्रवाई को मनमाना माना और कहा कि जब कर्मचारी नें सेवा के लगभग नौ वर्ष के भीतर ही जन्मतिथि को लेकर आपत्ति दर्ज करा दी थी, तो इसे सेवा के अंतिम चरण में उठाया गया विवाद नहीं माना जा सकता।
📡 Implementation Instruction No. 76 बना फैसले का अहम आधार…
न्यायाधिकरण ने Implementation Instruction No. 76 – Procedure for Determination/Verification of Age of Employees के प्रावधानों का विस्तार से परीक्षण किया।
निर्देश के अनुसार, गैर-मैट्रिक लेकिन शिक्षित कर्मचारी के मामले में मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्था द्वारा जारी School Leaving Certificate में दर्ज जन्मतिथि को सही जन्मतिथि के रूप में माना जाना है, वहीं जिन मामलों में जन्मतिथि का निर्धारण सीधे तौर पर संभव न हो, वहां उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जानी है।
न्यायाधिकरण नें माना कि वर्ष 1992 में कामगार द्वारा जन्मतिथि सुधार के लिए आवेदन दिए जानें के बाद प्रबंधन को Implementation Instruction No. 76 के अनुरूप मामले का परीक्षण कर निर्णय लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
📡 प्रबंधन की ‘देरी’ वाली दलील स्वीकार नहीं हुई…
SECL प्रबंधन की ओर से यह तर्क दिया गया कि वर्ष 1987 में सेवा अभिलेख संबंधी आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं, लेकिन उस समय कामगार नें आपत्ति नहीं की, इसलिए इतने वर्षों बाद जन्मतिथि में संशोधन की मांग स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
ट्रिब्यूनल नें इस तर्क को मामले के तथ्यों के आधार पर स्वीकार नहीं किया, क्योंकि रिकॉर्ड से यह सामनें आया कि कामगार नें 1992 में ही लिखित रूप से जन्मतिथि सुधारने की मांग कर दी थी।
प्रबंधन द्वारा यह भी कहा गया कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट की प्रमाणिकता पर सवाल है, लेकिन ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों और पूरे मामले के परीक्षण के बाद कामगार के पक्ष में निर्णय दिया गया।
📡 पुरानें न्यायिक फैसलों का भी किया गया परीक्षण…
सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों नें विभिन्न न्यायिक फैसलों का हवाला दिया, प्रबंधन नें Surendra Singh v/s State of M.P. तथा सुप्रीम कोर्ट के State of Tamil Nadu v/s T.V. Venugopalan जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए जन्मतिथि सुधार में देरी से संबंधित कानूनी सिद्धांत प्रस्तुत किए।
वहीं कामगार पक्ष नें South Eastern Coalfields Ltd. & Others v/s Sampat Kumar Chouhan के छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले सहित अन्य निर्णयों का हवाला दिया।
न्यायाधिकरण नें स्पष्ट किया कि वर्तमान मामले के तथ्य उन मामलों से अलग हैं, जहां कर्मचारी ने सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति के बिल्कुल अंतिम समय में पहली बार जन्मतिथि सुधार की मांग की थी।
📡 Deepali Gundu Surwase मामले के सिद्धांतों पर भी भरोसा…
बैक-वेज और सेवा की निरंतरता से संबंधित राहत पर विचार करते हुए न्यायाधिकरण नें सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्णय Deepali Gundu Surwase (2013) 10 SCC 324 के सिद्धांतों का उल्लेख किया।
इसमें गलत तरीके से सेवा से वंचित किए गए कर्मचारी को सेवा की निरंतरता और बैक-वेज से संबंधित सिद्धांतों पर विचार किया गया है, न्यायाधिकरण नें इसी कानूनी स्थिति को वर्तमान मामले के तथ्यों के साथ देखते हुए कामगार को परिणामी लाभ देनें का आदेश दिया।

📡 02 जनवरी 1960 को आधार मानकर सेवा में रखने का आदेश…
अवार्ड में न्यायाधिकरण नें कहा कि कामगार बारे लाल को 02 जनवरी 1960 की जन्मतिथि के आधार पर नियुक्ति की तारीख से वास्तविक सेवानिवृत्ति तिथि तक सेवा में माना जाए।
इसके साथ ही उन्हें सभी consequential in-service एवं post-retiral benefits, जिसमें back wages भी शामिल हैं, प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।
📡 90 दिन में भुगतान, देरी पर 06 प्रतिशत ब्याज…
न्यायाधिकरण नें SECL प्रबंधन को निर्देश दिया है कि कामगार को मिलनें वाले सभी सेवा एवं सेवानिवृत्ति संबंधी लाभों का भुगतान अवार्ड की तारीख से 90 दिनों के भीतर किया जाए।
यदि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं किया जाता है, तो देय राशि पर 06 प्रतिशत प्रतिवर्ष की दर से ब्याज अवार्ड की तारीख से वास्तविक भुगतान तक देना होगा।
📡 राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन नें उठाया था मामला…
मामले में कामगार का पक्ष राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन की ओर से भी मजबूती से उठाया गया, न्यायाधिकरण के रिकॉर्ड में फेडरेशन के महासचिव द्वारा कामगार के विवाद को संदर्भित किए जानें का उल्लेख है।
यह फैसला न केवल कामगार बारे लाल के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, बल्कि कोलियरी क्षेत्र में सेवा अभिलेखों में जन्मतिथि निर्धारण, वैध दस्तावेजों की अनदेखी और प्रबंधन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जानें से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
📡 फैसले का सार…
CGIT जबलपुर नें SECL चिरमिरी प्रबंधन की ओर से सही जन्मतिथि दर्ज नहीं करनें की कार्रवाई को अवैध, मनमानी एवं अनुचित माना, 02 जनवरी 1960 को बारे लाल की सही जन्मतिथि स्वीकार करते हुए उन्हें उसी आधार पर सेवा में माना गया तथा बैक-वेज सहित सभी परिणामी सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ देनें का आदेश दिया गया है, भुगतान 90 दिनों में नहीं होनें पर 06 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देय होगा।
अवार्ड दिनांक- 30 जून 2026
प्रकरण- CGIT/LC/R/51/2016
न्यायालय- Central Government Industrial Tribunal, Jabalpur (M.P.)
पीठासीन अधिकारी : पी.के. श्रीवास्तव, H.J.S. (Retd.)




