कोसा कृमिपालन से ध्रुवकुमार की आय बढ़ी, खेती-मजदूरी के साथ रेशम उत्पादन बना अतिरिक्त आमदनी का जरिया
📡36garhnewsupdate.com


सारंगढ़-बिलाईगढ़, 5 अक्टूबर 2026
सेवा संकल्प अभियान के बीच जिले में ग्रामीण परिवारों की आजीविका में बदलाव की कई प्रेरक कहानियां सामने आ रही हैं। बरमकेला विकासखंड के ग्राम सण्डा निवासी कृषक ध्रुवकुमार ने खेती और मजदूरी के साथ टसर कोसा कृमिपालन को अपनाकर अपनी आय का अतिरिक्त स्रोत विकसित किया है। रेशम विभाग के मार्गदर्शन और अपनी मेहनत से उन्होंने कृमिपालन को परिवार की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण साधन बनाया है।
ध्रुवकुमार पिता दुडूराम का परिवार पहले मुख्य रूप से कृषि से होने वाली आय पर निर्भर था। सीमित आमदनी के बीच उन्होंने रेशम विभाग से जुड़कर कोसा कृमिपालन की शुरुआत की। विभाग और केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा आयोजित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें कृमिपालन की तकनीक, उत्पादन और बेहतर प्रबंधन की जानकारी मिली।
रेशम प्रभाग द्वारा हितग्राहियों को रियायती दर पर स्व.डि. समूह उपलब्ध कराया जाता है। इसी के माध्यम से ध्रुवकुमार गुणवत्ता युक्त टसर ककून का उत्पादन कर आय अर्जित कर रहे हैं। इसके साथ ही केंद्र के उद्यान के संधारण कार्य से भी उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है।
तीन वर्षों में बढ़ी आय
ध्रुवकुमार की मेहनत का असर उनकी आय में भी दिखाई देता है। टसर ककून उत्पादन और उद्यान संधारण कार्य से उन्होंने वर्ष 2024-25 में 3,21,058 रुपये, वर्ष 2025-26 में 3,63,270 रुपये तथा वर्ष 2026-27 में अब तक 77,719 रुपये की आय अर्जित की है।
लगातार मिल रही अतिरिक्त आमदनी से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। इससे घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का सपना भी पूरा हो रहा है।
लंबे समय से रेशम विभाग से जुड़े ध्रुवकुमार भविष्य में भी कृमिपालन की योजनाओं से जुड़े रहकर अपनी आय बढ़ाना चाहते हैं। वे अपने क्षेत्र के अन्य किसानों को भी टसर कोसा कृमिपालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि पारंपरिक खेती के साथ आजीविका के नए साधनों को अपनाकर ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।


