AMBIKAPURCHHATTISGARH

राजेश अग्रवाल: सरगुजा से छत्तीसगढ़ की पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलानें की जिम्मेदारी

📡 36garhnewsupdate.com...

अंबिकापुर से विधानसभा तक का राजनीतिक सफर, अब पर्यटन और संस्कृति के विकास की बड़ी जिम्मेदारी…

रायपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ की पहचान केवल खनिज संपदा और घने जंगलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहर, धार्मिक आस्था और लोक परंपराओं की समृद्ध विरासत भी मौजूद है। राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा देने की जिम्मेदारी वर्तमान में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के कंधों पर है। अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले राजेश अग्रवाल के सामने अब सरगुजा से लेकर बस्तर तक फैली पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की बड़ी चुनौती और अवसर दोनों हैं।

✒️ अंबिकापुर से विधानसभा तक राजनीतिक सफर…

राजेश अग्रवाल ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में अंबिकापुर विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 90,780 मत मिले और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी टी.एस. सिंहदेव को बेहद कम अंतर से पराजित किया। इसके बाद वे छत्तीसगढ़ की छठी विधानसभा के सदस्य बने। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें अंबिकापुर क्षेत्र का भाजपा विधायक बताया गया है।

विधानसभा में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय और राज्य स्तरीय विकास के मुद्दों पर अपनी बात रखी है। अब पर्यटन और संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके राजनीतिक दायित्व का दायरा और व्यापक हो गया है।

✒️ सरगुजा: प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत का खजाना…

सरगुजा अंचल छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर विशेष महत्व रखता है। पहाड़, पठार, जंगल, नदियां और आदिवासी संस्कृति इस क्षेत्र को विशिष्ट बनाते हैं। मैनपाट जैसे प्राकृतिक पर्यटन स्थल, रामायणकालीन मान्यताओं से जुड़े रामगढ़ और सीताबेंगरा जैसे स्थल तथा सरगुजा की विविध जनजातीय परंपराएं पर्यटन की दृष्टि से बड़ी संभावनाएं रखती हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल भी सरगुजा को प्राकृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं से समृद्ध क्षेत्र के रूप में प्रस्तुत करता है।

ऐसे में पर्यटन मंत्री के सामने सरगुजा में बेहतर सड़क और परिवहन सुविधा, पर्यटक आवास, स्थानीय गाइड, होम-स्टे, स्वच्छता और डिजिटल प्रचार को मजबूत करने की दिशा में काम करने की महत्वपूर्ण संभावना है। इससे पर्यटन के साथ स्थानीय युवाओं, महिला समूहों, हस्तशिल्पकारों और छोटे व्यवसायों को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।

✒️ बस्तर: प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और रोमांच का संगम…

छत्तीसगढ़ के पर्यटन विकास में बस्तर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जगदलपुर और आसपास का क्षेत्र अपने घने जंगलों, जलप्रपातों, प्राकृतिक गुफाओं, वन्यजीवन, प्राचीन मंदिरों, जनजातीय कला और लोक संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल बस्तर को प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय कला-संस्कृति से समृद्ध महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र के रूप में रेखांकित करता है।

बस्तर की पर्यटन क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाए तो ईको-टूरिज्म, सांस्कृतिक पर्यटन और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय समुदायों की भागीदारी के साथ पर्यटन मॉडल विकसित करने से संस्कृति के संरक्षण के साथ आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

✒️ पर्यटन विकास की प्राथमिकताएं…

राजेश अग्रवाल के सामने छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई पहचान देने के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इनमें प्रमुख रूप से—

  • प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आधुनिक पर्यटक सुविधाओं का विस्तार।
  • सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना।
  • स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ना।
  • होम-स्टे और ग्रामीण पर्यटन को प्रोत्साहित करना।
  • जनजातीय कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों को पर्यटन से जोड़ना।
  • पर्यटन स्थलों का डिजिटल और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार।
  • धार्मिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को एकीकृत रूप से विकसित करना।
  • पर्यावरण संरक्षण के साथ ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देना।

छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल की स्थापना भी पर्यटन को सामाजिक-आर्थिक विकास का माध्यम बनाने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे में पर्यटन विकास को स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से जोड़ना विभाग की महत्वपूर्ण दिशा हो सकती है।

✒️ सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करनें की चुनौती…

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान उसके लोकनृत्य, लोकगीत, पारंपरिक कला, जनजातीय जीवनशैली, पर्व-त्योहार और ऐतिहासिक स्थलों में दिखाई देती है। बस्तर की जनजातीय संस्कृति से लेकर सरगुजा की लोक परंपराओं और सिरपुर जैसी ऐतिहासिक धरोहरों तक, राज्य के पास सांस्कृतिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं।

जरूरत इस बात की है कि विकास के साथ इन विरासतों का संरक्षण भी सुनिश्चित हो। स्थानीय कलाकारों और समुदायों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़कर संस्कृति को केवल प्रदर्शन का विषय न बनाकर स्थानीय अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाया जा सकता है।

✒️ नई पहचान की दिशा में बड़ी जिम्मेदारी…

राजेश अग्रवाल के लिए पर्यटन एवं संस्कृति विभाग का दायित्व केवल पर्यटन स्थलों के विकास तक सीमित नहीं है। यह छत्तीसगढ़ की पहचान को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का अवसर भी है। यदि सरगुजा, बस्तर और प्रदेश के अन्य क्षेत्रों की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक संपदा को बेहतर बुनियादी सुविधाओं, प्रभावी प्रचार और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के साथ विकसित किया जाता है, तो छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी अलग पहचान बना सकता है।

अंबिकापुर से राजनीतिक यात्रा शुरू कर विधानसभा तक पहुंचे राजेश अग्रवाल के सामने अब एक बड़ी जिम्मेदारी है—छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन के माध्यम से नई पहचान दिलाना। आने वाले वर्षों में उनके विभाग की नीतियां और योजनाएं यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं कि छत्तीसगढ़ पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर कितनी मजबूती से अपनी जगह बनाता है।

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest