अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस पर पालकों को किया जागरूक, बच्चों को नशे से बचाने का दिया संदेश
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नया रायपुर, छत्तीसगढ़। 26 जून 2026
26 जून अंतर्राष्ट्रीय नशा निवारण दिवस के अवसर पर संकल्प सांस्कृतिक समिति की डायरेक्टर मनीषा शर्मा के निर्देशन में संकल्प नशा मुक्ति केंद्र, शंकर नगर रायपुर, स्टेट लेवल कॉर्डिनेटिंग एजेंसी, आउटरीच ड्रॉप-इन सेंटर एवं कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन नया रायपुर स्थित क्रिस्टल इंडिया लर्निंग स्कूल में अध्ययनरत विद्यार्थियों के पालकों के लिए किया गया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने नशे के दुष्परिणाम, उससे बचाव के उपाय तथा उपलब्ध उपचार सेवाओं की विस्तृत जानकारी दी। पालकों को बताया गया कि अधिकांश बच्चे अपने परिवार के बड़े सदस्यों, विशेषकर पिता या अन्य परिजनों को नशा करते हुए देखकर प्रभावित होते हैं और धीरे-धीरे स्वयं भी इसकी ओर आकर्षित हो जाते हैं। इसके अलावा, वर्तमान समय में कई बच्चे घर में दैनिक उपयोग की वस्तुओं का भी नशे के रूप में दुरुपयोग कर रहे हैं, जो उनके शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है।

वक्ताओं ने कहा कि नशे की लत बच्चों और किशोरों को अपराध की दुनिया की ओर भी धकेल रही है। कई मामलों में बच्चे नशीले पदार्थों की पूर्ति के लिए चोरी जैसी घटनाओं में भी शामिल हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
पालकों से अपील की गई कि वे बच्चों के साथ नियमित संवाद बनाए रखें, उन्हें पर्याप्त समय दें तथा उनकी गतिविधियों पर सतर्क नजर रखें। यदि किसी बच्चे में नशे की आशंका दिखाई दे तो बिना देर किए किसी मान्यता प्राप्त नशा मुक्ति केंद्र से परामर्श एवं उपचार की सहायता लें।

इस अवसर पर अभिभावकों को स्वयं भी नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया। बताया गया कि नशे का प्रभाव तत्काल दिखाई न दे, लेकिन लंबे समय में यह अनेक गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बनता है।
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं एवं अन्य अभिभावकों ने नशा मुक्ति, बचाव और उपचार से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से समाधान किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में संकल्प के सदस्यों तथा क्रिस्टल इंडिया लर्निंग स्कूल के समस्त स्टाफ का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन का उद्देश्य समाज में नशामुक्त वातावरण का निर्माण करना तथा अभिभावकों को बच्चों के भविष्य की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना था।



