सारंगढ़ जिला अस्पताल की ठेका व्यवस्था पर सवाल: लाइसेंस, कार्यस्थल और श्रमिक संख्या की जांच की मांग
36garhnewsupdate.com

सारंगढ़ 24/06/2026
जिला अस्पताल सारंगढ़ में सुरक्षा गार्ड एवं सफाई कर्मियों की मैनपावर सप्लाई से जुड़ी ठेका व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सामने आए श्रम लाइसेंस दस्तावेजों के आधार पर ठेका एजेंसी की वैधता, कार्यस्थल, स्वीकृत श्रमिक संख्या और भुगतान प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

मामले में उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के लाइसेंसिंग अधिकारी, रायपुर द्वारा परफेक्ट सिक्योरिटी सर्विस के नाम से लाइसेंस क्रमांक RPR/2023/44031688 जारी किया गया है। दस्तावेजों में एजेंसी के प्रोपराइटर के रूप में बाली राम सिंह का नाम दर्ज है।
दस्तावेजों में अलग-अलग अवधि के लाइसेंस सामने आए हैं। एक लाइसेंस की वैधता 01 अप्रैल 2023 से 31 मार्च 2024 तक दर्ज है। वहीं अन्य दस्तावेजों में अवधि 01 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तथा 01 मार्च 2025 से 28 फरवरी 2026 तक दर्शाई गई है। इसे लेकर यह सवाल उठ रहा है कि सारंगढ़ जिला अस्पताल में संबंधित अवधि के दौरान एजेंसी द्वारा किस लाइसेंस और किस कार्यादेश के आधार पर सेवाएं दी गईं।

रायपुर का कार्यस्थल, सारंगढ़ में सेवा का सवाल
उपलब्ध दस्तावेजों में कार्यस्थल के रूप में समता कॉलोनी, रायपुर तथा मुख्य नियोक्ता के रूप में एम.डी. हॉस्पिटल एंड आईसीयू, 358 समता कॉलोनी, रायपुर का उल्लेख है। जबकि संबंधित एजेंसी के सारंगढ़ जिला अस्पताल में सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है।
इस आधार पर सवाल उठाए गए हैं कि क्या एजेंसी के पास सारंगढ़ जिला अस्पताल के लिए अलग से वैध श्रम लाइसेंस, वर्क ऑर्डर, फॉर्म-वी और अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
केवल 20 श्रमिकों की अनुमति का उल्लेख
दस्तावेज में एजेंसी को 20 कॉन्ट्रैक्ट लेबर नियोजित करने की अनुमति का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जिला अस्पताल में सुरक्षा और सफाई कार्य में इससे अधिक कर्मचारियों की सेवाएं ली जा रही हैं। यदि कर्मचारियों की संख्या स्वीकृत सीमा से अधिक है, तो संबंधित विभागों द्वारा इसकी जांच आवश्यक बताई जा रही है।
एम.डी. हॉस्पिटल प्रबंधन के कथित दावे पर भी जांच जरूरी
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, एम.डी. हॉस्पिटल एंड आईसीयू प्रबंधन ने कथित रूप से कहा है कि उनके यहां संबंधित एजेंसी को सुरक्षा या सफाई का ठेका नहीं दिया गया था। यह भी आरोप लगाया गया है कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से वर्क ऑर्डर अथवा फॉर्म-वी जारी नहीं किया गया।
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। मामले में संबंधित अस्पताल प्रबंधन, ठेका एजेंसी, श्रम विभाग और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष लिया जाना आवश्यक है।
पीएफ-ईएसआईसी और कर्मचारियों के अधिकारों को लेकर भी शिकायत
भारतीय मानव अधिकार संगठन के प्रतिनिधियों द्वारा जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाने की बात सामने आई है। ज्ञापन में कथित तौर पर कर्मचारियों के शोषण, पीएफ-ईएसआईसी जमा नहीं होने और ठेका व्यवस्था में अनियमितता की शिकायत की गई है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर, श्रम विभाग और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि जिला अस्पताल की ठेका व्यवस्था, एजेंसी के लाइसेंस, कार्यादेश, कर्मचारियों की वास्तविक संख्या, बिल भुगतान, पीएफ-ईएसआईसी जमा और अन्य दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ठेका एजेंसी द्वारा सेवाएं नियमों के अनुरूप दी जा रही थीं या नहीं तथा किसी स्तर पर अनियमितता हुई है या नहीं।
समाचार में संबंधित पक्षों का जवाब मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।



