कृषि छात्रों ने 12 दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण में जाना आधुनिक कृषि और भारतीय संस्कृति
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कांकेर, छत्तीसगढ़। 23 जून 2026
रामप्रसाद पोटाई कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सिंगारभाट (कांकेर) के बी.एससी. (कृषि) के 51 विद्यार्थियों का 12 दिवसीय दक्षिण भारत शैक्षणिक भ्रमण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एन.के. रस्तोगी के मार्गदर्शन में आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण में डॉ. जे.एल. सलाम, डॉ. पीयूष कांत नेताम एवं सुश्री नेहा कंवर ने टीम मैनेजर के रूप में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
अधिष्ठाता डॉ. रस्तोगी ने बताया कि 4 जून से 15 जून 2026 तक आयोजित इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि अनुसंधान, वैज्ञानिक नवाचार, जैव-विविधता तथा देश की सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना था। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रतिष्ठित कृषि एवं वैज्ञानिक संस्थानों का दौरा कर आधुनिक कृषि तकनीकों और अनुसंधान गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।
यात्रा के प्रथम चरण में विद्यार्थियों ने हैदराबाद स्थित अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क कटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) एवं राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (NIPHM) का भ्रमण किया। यहां उन्होंने फसल सुधार, जैव-सुदृढ़ीकरण, उन्नत बीज प्रौद्योगिकी तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय का भ्रमण कर वहां संचालित शोध एवं शैक्षणिक गतिविधियों का अवलोकन किया।
विद्यार्थियों ने हैदराबाद के प्रमुख ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों—हुसैन सागर झील, गोलकुंडा किला, चारमीनार तथा सालार जंग संग्रहालय का भी भ्रमण किया, जिससे उन्हें भारत की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समझने का अवसर मिला।

भ्रमण के अगले चरण में दल ने तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय, कोयंबटूर का दौरा किया। यहां विद्यार्थियों ने कीट संग्रहालय, कृषि नैनो टेक्नोलॉजी प्रयोगशाला, बीज प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विभाग, राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (NAHEP) तथा जलग्रहण एवं जीआईएस विभाग की गतिविधियों का अध्ययन किया। आधुनिक कृषि अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों से जुड़ी यह जानकारी विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुई।
शैक्षणिक दल ने ऊटी में राजकीय बॉटनिकल गार्डन, चाय एवं चॉकलेट निर्माण इकाइयों का अवलोकन किया तथा प्रसिद्ध टॉय ट्रेन की यात्रा का अनुभव भी प्राप्त किया। यात्रा के अंतिम चरण में विद्यार्थियों ने चेन्नई स्थित बी.एम. बिड़ला तारामंडल एवं पेरियार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र का भ्रमण कर खगोलीय विज्ञान एवं वैज्ञानिक नवाचारों के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही उन्होंने तिरुमला मंदिर, समुद्र तटों एवं विभिन्न चर्चों का भी भ्रमण किया।
मार्गदर्शक प्राध्यापकों ने बताया कि यह भ्रमण विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक यात्रा नहीं, बल्कि कक्षा से बाहर सीखने का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुआ। विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नैनो टेक्नोलॉजी, उन्नत बीज प्रौद्योगिकी एवं आधुनिक अनुसंधान प्रणालियों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला।
विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस भ्रमण ने उनके भीतर वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं एवं विरासत के प्रति नई समझ और सम्मान विकसित किया है। महाविद्यालय प्रबंधन ने इसे विद्यार्थियों के समग्र शैक्षणिक एवं व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया।



