पूर्व सरपंच सहोद्रा सुशील भारद्वाज ने सुशासन तिहार में उठाई समस्या, शासन-प्रशासन से लगाई गुहार
खरकेना में गहराया जल संकट, बेस्वाद पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
खरकेना/डभरा, 22 जून 2026
वरिष्ठ पत्रकार : लक्ष्मीनारायण लहरे
36garhnewsupdate.comनवगठित जिला सक्ती के विकासखंड डभरा अंतर्गत ग्राम पंचायत खरकेना इन दिनों अपनी गंभीर जल समस्या को लेकर चर्चा में है। डभरा विकासखंड के कस्बा कोटमी से लगभग 3 किलोमीटर दूर स्थित यह गांव कभी आदर्श पंचायत के रूप में पहचान बना चुका है, लेकिन वर्तमान में पेयजल संकट और निस्तारी की समस्या ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

करीब तीन हजार से अधिक आबादी वाले इस अनुसूचित जनजाति बाहुल्य गांव में पिछले कुछ वर्षों से भू-जल स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। स्थिति यह है कि कई बोरवेल सूख चुके हैं और अनेक हैंडपंपों का पानी बेस्वाद तथा पीने योग्य नहीं रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जल संकट के कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।

सुशासन तिहार में अनोखे अंदाज में उठाई आवाज
ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच श्रीमती सहोद्रा सुशील भारद्वाज ने 5 जून को घुरकोट में आयोजित सुशासन तिहार के दौरान सीधे मंच पर पहुंचकर गांव की समस्या शासन-प्रशासन के समक्ष रखी थी। उनके इस प्रयास की क्षेत्र में व्यापक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि अपने कार्यकाल में पंचायत को आदर्श पंचायत का दर्जा दिलाया गया था, लेकिन आज भी गांव की मूलभूत समस्या पानी बनी हुई है।
पूर्व सरपंच के अनुसार, पेयजल संकट को दूर करने के लिए 14 बोरवेल खुदवाए गए, लेकिन अधिकांश में पर्याप्त पानी नहीं मिला। उन्होंने बताया कि कई पुराने हैंडपंप और बोरवेल का पानी भी स्वादहीन हो चुका है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
निस्तारी के लिए भी बढ़ी मुश्किलें
गांव में केवल पेयजल ही नहीं बल्कि निस्तारी की समस्या भी गंभीर रूप ले चुकी है। तालाबों की स्थिति संतोषजनक नहीं होने से ग्रामीणों को पशुओं और घरेलू उपयोग के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ग्रामीणों का मानना है कि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

कंठी टॉयर जलाशय बना उम्मीद की किरण
गांव के मध्य स्थित लगभग 40 एकड़ क्षेत्र में फैला कंठी टॉयर जलाशय ग्रामीणों के लिए उम्मीद की सबसे बड़ी किरण माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जलाशय का गहरीकरण और जीर्णोद्धार होने से भू-जल स्तर में सुधार आएगा तथा गांव को नई पहचान मिल सकती है।
जानकारी के अनुसार, जलाशय के जीर्णोद्धार के लिए लगभग 2 करोड़ 97 लाख रुपये की स्वीकृति मिली थी, लेकिन प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। ग्रामीण अब शासन से इस परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग कर रहे हैं।
टैंकर से हो रही पानी की व्यवस्था
जल संकट को देखते हुए वर्तमान ग्राम पंचायत द्वारा टैंकर के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं केंद्र सरकार की हर घर नल-जल योजना का लाभ भी गांव के सभी घरों तक अभी नहीं पहुंच पाया है। इससे ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि कंठी टॉयर जलाशय उनके पूर्वजों की धरोहर है। यदि इसका गहरीकरण और जीर्णोद्धार किया जाए तो गांव की जल समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से इस दिशा में शीघ्र पहल करने की मांग की है।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब सुशासन तिहार जैसे मंच पर भी उनकी समस्या उठाई गई, तब भी अब तक ठोस समाधान क्यों नहीं निकल सका? गांववासी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि आने वाले समय में कंठी टॉयर जलाशय का जीर्णोद्धार होगा और खरकेना को जल संकट से राहत मिलेगी।



