वृंदावन सभागार में कविताओं से गूंजा साहित्यिक माहौल, दैनिक दबंग स्वर के जगदलपुर संस्करण का हुआ शुभारंभ
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रायपुर, छत्तीसगढ़। 20 जून 2026
राजधानी रायपुर स्थित वृंदावन सभागार में अग्रणी सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था वक्ता मंच तथा जन एकता फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भव्य समारोह में दैनिक समाचार पत्र ‘दबंग स्वर’ के जगदलपुर संस्करण का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर आयोजित काव्य गोष्ठी में प्रदेश भर से पहुंचे 45 से अधिक कवियों ने अपनी प्रभावशाली रचनाओं की प्रस्तुति देकर साहित्यिक वातावरण को जीवंत बना दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्धजनों, साहित्यकारों एवं पत्रकारों की उपस्थिति के बीच अतिथियों द्वारा जगदलपुर संस्करण का विमोचन किया गया। विमोचन के दौरान सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से देर तक गूंजता रहा।
वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते ने दैनिक दबंग स्वर की सराहना करते हुए कहा कि यह समाचार पत्र सकारात्मक पत्रकारिता और जनसरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र में साहित्य को विशेष स्थान दिए जाने से इसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधान संपादक डॉ. पी.के. तिवारी के नेतृत्व में दबंग स्वर शीघ्र ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
दैनिक दबंग स्वर के प्रधान संपादक डॉ. पी.के. तिवारी ने पाठकों, लेखकों एवं शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वस्थ एवं सकारात्मक पत्रकारिता का अभियान निरंतर आगे बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि अल्प समय में रायपुर, दुर्ग, मनेन्द्रगढ़ और अब जगदलपुर तक समाचार पत्र का विस्तार जनसमर्थन और विश्वास का प्रमाण है।
✒️ काव्य गोष्ठी में बिखरे साहित्यिक रंग…
विमोचन समारोह के साथ आयोजित काव्य गोष्ठी की मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवयित्री आशा साहू थीं, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पी.के. तिवारी ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार सीमा पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी तथा समाजसेविका ज्योति शुक्ला उपस्थित रहीं।
काव्य गोष्ठी में हिंदी, उर्दू और छत्तीसगढ़ी भाषा की रचनाओं ने श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। कवियों की प्रस्तुतियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं और वाहवाही की।

✒️ प्रमुख काव्य प्रस्तुतियां…
कमलेश साहू (सरोरा) ने छत्तीसगढ़ की माटी और संस्कृति को स्वर देते हुए प्रस्तुत किया—
“धान के कटोरा जिन्हा जुरमिल के सब रहिथे,
मैं ऊंहा के रहरिया आंव, जेन ल छत्तीसगढ़ कहिथे।”
दुष्यंत साहू (डूंडा) ने गांव की स्मृतियों को अपनी रचना में उकेरा—
“कहां मोर गाँव संगी, कहां मोर गाँव,
जिहा कौंवा के काँव, चिरई के चांव।”
सुनीता वैष्णव ने कविता और जीवन के संबंध को अभिव्यक्त किया, जबकि अमित चौहान ने संतोष, सदाचार और संगति के महत्व पर आधारित रचना प्रस्तुत की।
सुषमा प्रेम पटेल ने योग दिवस के संदर्भ में व्यंग्यात्मक कविता से श्रोताओं को गुदगुदाया, वहीं एस.एन. जोशी की मां के प्रति समर्पण से भरी गजल को विशेष सराहना मिली।
विजया ठाकुर ने पर्यावरण संरक्षण और यमुना की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की, जबकि डॉ. रत्ना पाण्डेय ने आध्यात्मिक चिंतन से ओतप्रोत रचना प्रस्तुत की।

✒️ 45 से अधिक कवियों ने किया काव्य पाठ…
काव्य समागम में आशा साहू, डॉ. पी.के. तिवारी, सीमा पांडेय, राजकुमार धर द्विवेदी, ज्योति शुक्ला, राजेश पराते, शुभम साहू, विवेक बेहरा, डॉ. रत्ना पाण्डेय, एन.पी. विश्वकर्मा ‘तृण’, विजय कुमार कोसले, चंद्रा वैष्णव, राजाराम रसिक, लक्ष्मीकांत वैष्णव, दुष्यंत साहू, देव मानिकपुरी, मयूराक्षी मिश्रा, डॉ. मन्नूलाल चेलक, लक्ष्मण दास, संजय देवांगन, सुनीता वैष्णव, संगीता निर्मलकर, राजेंद्र रायपुरी, छबिलाल सोनी, अपूर्व तिवारी, तामेश्वर साहू, एस.एन. जोशी, बलजीत कौर, नंदिनी लहेजा, लोकनाथ साहू, दिव्या वर्मा, डॉ. सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव, नरेंद्र कुमार साहू, पोषण पटेल, दिलीप टिकरिहा, मन्नूलाल यदु, सुषमा पटेल, रुनाली चक्रवर्ती, कल्याणी तिवारी, कुमार जगदली, रश्मि चौहान, अमित कुमार चौहान, हर्षलता मिश्रा, विजया ठाकुर, कमलेश साहू, भावना साहू सहित 45 से अधिक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कार्यक्रम का प्रभावी संचालन राजेश पराते ने किया, जबकि शुभम साहू ने आभार प्रदर्शन किया। वक्ता मंच एवं जन एकता फाउंडेशन की ओर से सभी अतिथियों, साहित्यकारों और प्रतिभागियों का अभिनंदन करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।



