शख्सियत : दिव्यांग बच्चों की जिंदगी संवार रहीं सामाजिक कार्यकर्ता हीरा देवी निराला
57वें जन्मदिवस पर विशेष
वरिष्ठ पत्रकार लक्ष्मीनारायण लहरे

रायपुर/सारंगढ़-बिलाईगढ़।
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समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो अपने संघर्षों को शक्ति बनाकर दूसरों के जीवन में नई रोशनी भरते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् श्रीमती हीरा देवी निराला उन्हीं प्रेरणादायी हस्तियों में से एक हैं, जिन्होंने अपने जीवन के बीते दो दशक दिव्यांग बच्चों की सेवा और उनके भविष्य निर्माण को समर्पित कर दिए।
15 जून 1969 को जन्मीं हीरा देवी निराला आज अपना 57वां जन्मदिवस मना रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, सेवा, त्याग और समर्पण की मिसाल है। महज 37 वर्ष की आयु में जीवन के कठिन दौर से गुजरने के बाद उन्होंने समाज सेवा की राह चुनी और दिव्यांग बच्चों के जीवन में मुस्कान लाने का संकल्प लिया।
सामाजिक विज्ञान में स्नातकोत्तर (एम.ए.) हीरा देवी निराला सारंगढ़ जिला मुख्यालय में वर्ष 2006 से “प्रांजल विशेष दिव्यांगजन स्कूल” का संचालन कर रही हैं। पिछले 20 वर्षों से वे ऐसे बच्चों के बीच रहकर कार्य कर रही हैं, जो सुन नहीं सकते, बोल नहीं सकते या देख नहीं सकते। उन्हें शिक्षा देना, आत्मनिर्भर बनाना और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसे वे एक मां की तरह निभा रही हैं।
स्कूल में अध्ययनरत लगभग 40 दिव्यांग बच्चों के लिए हीरा देवी केवल संचालिका नहीं, बल्कि “मां” हैं। बच्चे उन्हें इसी नाम से पुकारते हैं। उनके स्नेह, अनुशासन और समर्पण ने प्रांजल विशेष स्कूल को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में एक अलग पहचान दिलाई है।
हीरा देवी निराला केवल विशेष स्कूल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वृद्धाश्रम की जिम्मेदारियों का भी निर्वहन कर रही हैं। समाज के प्रति उनकी संवेदनशीलता और सेवा भावना ने उन्हें जिले की सशक्त सामाजिक प्रहरी एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया है।
उनके उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए उन्हें अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। रायपुर की अग्रणी सामाजिक एवं साहित्यिक संस्था “वक्ता मंच” द्वारा उन्हें “छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवार्ड 2025” से सम्मानित किया गया। इसके अलावा उन्हें “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम राष्ट्रीय उत्कृष्टता सम्मान”, “डॉ. भीमराव अंबेडकर विरासत सम्मान 2026”, “नारी सशक्तिकरण सम्मान”, “महिला गौरव सम्मान 2026”, “नई पीढ़ी की आवाज सम्मान” तथा “तुलसी साहित्य अकादमी सम्मान” सहित कई राष्ट्रीय एवं सामाजिक मंचों से सम्मान प्राप्त हो चुका है।
हीरा देवी निराला का मानना है कि टूटना जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। यही सोच उन्हें निरंतर समाज सेवा के लिए प्रेरित करती है। अखबारों की सुर्खियों से भले ही उनका कार्य दूर रहा हो, लेकिन उनके प्रयास हजारों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।
आज उनके 57वें जन्मदिवस पर समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा उन्हें शुभकामनाएं दी जा रही हैं। उनका जीवन संदेश देता है कि सेवा, त्याग और प्रेम से ही समाज को नई दिशा दी जा सकती है।


