अधिकारों की लड़ाई को मिलेगा नया स्वर, 12 जून को कुसमुंडा में होगी ठेका मजदूर एवं भूविस्थापित महासभा
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महासभा की तैयारियों को लेकर हुई बैठक, जिम्मेदारियों का किया गया वितरण
कुसमुंडा/कोरबा, छत्तीसगढ़। 11 जून 2026
कोयला खदानों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों के अधिकारों, रोजगार, सुरक्षा तथा विभिन्न लंबित मांगों को लेकर राष्ट्रीय कोलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के बैनर तले 12 जून 2026 को कुसमुंडा में विशाल महासभा आयोजित की जाएगी। संगठन के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर आयोजित यह महासभा दोपहर 3 बजे से महतारी अंगना मैदान, कुसमुंडा में होगी।
महासभा को सफल बनाने के लिए आयोजकों द्वारा एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई तथा विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदारियों का वितरण किया गया।
✒️ ठेका मजदूरों और भूविस्थापितों के मुद्दों पर होगी चर्चा…
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कोयला खदानों और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े ठेका मजदूरों एवं भूविस्थापित परिवारों को रोजगार, सुरक्षा, श्रमिक अधिकारों और पुनर्वास जैसे कई मुद्दों पर लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सभी प्रभावित वर्गों को एक मंच पर लाकर उनकी समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने और अधिकारों की लड़ाई को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि महासभा का उद्देश्य श्रमिकों और भूविस्थापितों की आवाज को संगठित रूप से सामने लाना तथा उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनसमर्थन तैयार करना है।
✒️ तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे आयोजक…
महासभा की तैयारियों को लेकर आयोजित बैठक में क्षेत्र के अनेक सामाजिक कार्यकर्ताओं, श्रमिक प्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। बैठक में कैलाश साहू, विनोद सारथी, अशोक पटेल, विष्णु प्रसाद, गोविंदा सारथी, राजेंद्र पटेल, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, कान्हा प्रकाश जायसवाल, राजू पटेल, नरेश महंत, हेमंत नामदेव, प्रमोद चंद्रा, उदय पटेल, सुरेश पटेल, रामकुमार चंद्रा, आनंद यादव, गणेश दास, विजय महंत, अनिल कंवर, देवनाथ नामदेव, बोधन चौहान, अशोक देवांगन, जितेंद्र साहू, कान्हा अहीर, तेरस लाल, लखन लाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
✒️ अधिक से अधिक संख्या में पहुंचने की अपील…
आयोजक समिति ने कुसमुंडा एवं आसपास के क्षेत्रों के ठेका श्रमिकों, भूविस्थापित परिवारों और प्रभावित नागरिकों से महासभा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। समिति का कहना है कि व्यापक जनभागीदारी से श्रमिकों और भूविस्थापितों के मुद्दों को और मजबूती मिलेगी तथा उनके अधिकारों की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकेगा।
12 जून को आयोजित होने वाली यह महासभा क्षेत्र के श्रमिकों और भूविस्थापितों से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकती है।




