CHHATTISGARHनई दिल्ली

माता-पिता की सेवा के लिए 45 दिन सवेतन अवकाश का प्रस्ताव, कर्मचारियों में खुशी की लहर

45 Days Paid Parent Care Leave Proposed, Employees Welcome the Move

 

 

36gadrnewsupdetबरमकेला/नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। राज्यसभा में प्रस्तुत “पवित्र बंधन (माता-पिता देखभाल अवकाश) विधेयक, 2026” को मंजूरी मिल गई है। इस विधेयक के तहत कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल के लिए पूरे सेवाकाल में 45 दिन का सवैतनिक अवकाश (Parent Care Leave) प्रदान किया जाएगा।

इस निर्णय के बाद कर्मचारी वर्ग में उत्साह का माहौल है। कर्मचारी नेता नंदकिशोर पटेल ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि यह योजना कर्मचारियों के लिए श्रवण कुमार जैसी भूमिका निभाएगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में सहायक साबित होगी।

विधेयक का उद्देश्य

इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों को अपने वृद्ध माता-पिता की बीमारी, स्वास्थ्य देखभाल और आवश्यकताओं के दौरान समय देने की सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे बिना वेतन या नौकरी की चिंता किए अपने पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

मुख्य प्रावधान

विधेयक के अनुसार, किसी भी कर्मचारी को उसके पूरे सेवाकाल में अधिकतम 45 दिनों का Parent Care Leave मिलेगा। इस अवकाश का लाभ जैविक, दत्तक और सौतेले माता-पिता के साथ-साथ 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सास-ससुर के लिए भी लिया जा सकेगा।

यह नियम केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा ऐसे निजी संस्थानों पर लागू होगा जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं।

वेतन और शर्तें

यह अवकाश पूरी तरह से सवैतनिक (Full Pay) होगा और इसे कर्मचारी की अन्य छुट्टियों (जैसे कैजुअल या अर्जित अवकाश) से नहीं काटा जाएगा। हालांकि, बची हुई छुट्टियों के बदले नकद भुगतान (Encashment) का प्रावधान इसमें नहीं रखा गया है।

अवकाश लेने के लिए कर्मचारियों को मेडिकल सर्टिफिकेट या अस्पताल में भर्ती होने से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। आपात स्थिति में कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति के भी अवकाश ले सकता है, लेकिन उसे 7 कार्य दिवस के भीतर आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।

कर्मचारी सुरक्षा और दंड प्रावधान

विधेयक में कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इस अवकाश का लाभ लेने वाले कर्मचारियों के साथ प्रमोशन, इंक्रीमेंट या ट्रांसफर के मामलों में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

यदि कोई नियोक्ता बिना उचित कारण के अवकाश देने से इनकार करता है या कर्मचारी को परेशान करता है, तो उस पर ₹50,000 से ₹2,00,000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, फर्जी दस्तावेज के माध्यम से अवकाश लेने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और उसे प्राप्त वेतन वापस करना पड़ सकता है।

विधेयक लाने के कारण

देश में तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी, कामकाजी लोगों पर बढ़ता पारिवारिक दबाव और ‘सैंडविच जनरेशन’ की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह विधेयक लाया गया है। साथ ही, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त करने और माता-पिता की सेवा को प्रोत्साहित करने का उद्देश्य भी इसमें शामिल है।

कुल मिलाकर यह एक कल्याणकारी और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है, जिससे कर्मचारियों को अपने माता-पिता की देखभाल के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक अवसर मिल सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest