रायपुर

आयुष्मान योजना में इलाज नहीं मिलने का मुद्दा विधानसभा में गूंजा, बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया गंभीर मामला



रायपुर, 11 मार्च। प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों को इलाज नहीं मिलने का गंभीर मामला बुधवार को छत्तीसगढ़ विधानसभा में जोर-शोर से उठा। इस महत्वपूर्ण जनहित के विषय को बिलाईगढ़ की विधायक कविता प्राण लहरे ने ध्यानाकर्षण के माध्यम से सदन में उठाते हुए सरकार का ध्यान प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में आ रही गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित किया।

विधायक कविता प्राण लहरे ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार का उद्देश्य है। लेकिन वर्तमान समय में प्रदेश के कई जिलों में इस योजना का लाभ हितग्राहियों को सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है।

उन्होंने सदन में कहा कि प्रदेश के कई बड़े निजी अस्पताल आयुष्मान कार्ड के माध्यम से मरीजों का इलाज करने से मना कर रहे हैं, जिससे गरीब मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई मरीजों को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकना पड़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से उन गरीब परिवारों के लिए बेहद दुखद है, जिनके पास निजी इलाज कराने के लिए पर्याप्त आर्थिक संसाधन नहीं हैं।

विधायक कविता प्राण लहरे ने सदन को बताया कि अस्पताल संचालकों का कहना है कि आयुष्मान योजना के तहत किए गए इलाज का भुगतान लंबे समय से लंबित है, जिसके कारण कई निजी अस्पताल योजना के अंतर्गत मरीजों का इलाज करने से पीछे हट रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा तो स्वाभाविक रूप से वे योजना के तहत इलाज करने में असमर्थ होंगे, जिसका सीधा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है।

इस विषय पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सदन को जानकारी देते हुए कहा कि निजी अस्पतालों का लगभग 500 करोड़ रुपये का भुगतान अभी बकाया है। उन्होंने बताया कि जनवरी माह तक की राशि का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन शेष भुगतान अभी किया जाना बाकी है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभागीय समीक्षा कर अधिक से अधिक अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

सदन में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पक्षों के विधायकों ने भी चिंता व्यक्त की। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर, धर्मजीत सिंह और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने इसे जनहित से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि प्रदेश के कई बड़े अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं कर रहे हैं, जिससे मरीजों को इलाज के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ रहा है।

पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने कहा कि सरकार चाहे तो अस्पतालों पर आवश्यक दबाव बनाकर योजना के अंतर्गत इलाज की सुविधा सुनिश्चित कर सकती है। वहीं विधायक धर्मजीत सिंह ने कहा कि अस्पतालों पर कार्रवाई करने का अधिकार सरकार के पास है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि गरीबों को बड़े अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिले।

वहीं भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने बिलासपुर के अपोलो अस्पताल का उदाहरण देते हुए कहा कि इस विषय को लेकर वे स्वास्थ्य विभाग को सात बार पत्र लिख चुके हैं। वहीं विधायक आशाराम नेताम ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे को लेकर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

सदन में सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों के विधायकों ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वपूर्ण योजना है और इसके क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि योजना का पूरा लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे।

इस दौरान सभापति ने भी स्वास्थ्य मंत्री को इस विषय पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि किसी भी घोषणा के लिए निर्धारित नियम और दिशा-निर्देशों का पालन करना आवश्यक होता है। इस पर विधायक अजय चंद्राकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि यदि सरकार निजी अस्पतालों को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं कर सकती, तो उससे संबंधित नियमों को सदन की टेबल पर रखा जाना चाहिए।

अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सदन के सभी सदस्यों की चिंता को ध्यान में रखते हुए एक सप्ताह के भीतर विभागीय समीक्षा कर अधिक से अधिक अस्पतालों में आयुष्मान योजना का लाभ सुनिश्चित करने का निर्णय लिया जाएगा।

इस दौरान विधायक कविता प्राण लहरे ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि बाह्य रोगी विभाग (OPD) में आने वाले मरीजों के उपचार और आवश्यक जांच जैसे CT Scan, MRI, X-Ray, खून की जांच तथा सोनोग्राफी का खर्च भी आयुष्मान कार्ड के माध्यम से निजी अस्पतालों में उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इन जांचों का होना अत्यंत आवश्यक होता है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग इनका खर्च वहन करने में सक्षम नहीं होते। यदि इन जांचों को भी योजना के अंतर्गत शामिल किया जाए तो गरीब मरीजों को समय पर जांच और उपचार मिल सकेगा।

विधायक कविता प्राण लहरे ने कहा कि आयुष्मान योजना का उद्देश्य गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है, इसलिए सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रदेश का कोई भी गरीब व्यक्ति इलाज के अभाव में परेशान न हो।

प्रदेश में गरीबों, किसानों और मजदूरों के स्वास्थ्य अधिकारों को लेकर सदन में मजबूती से आवाज उठाने के लिए बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे की पहल को जनहित में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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