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18 कैरेट सोने को 22 कैरेट बताकर बेचने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का कोरबा पुलिस ने किया पर्दाफाश, चार आरोपी गिरफ्तार

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कोरबा | 30 अक्टूबर 2026

कोरबा पुलिस ने कम कैरेट के सोने को अधिक शुद्धता वाला बताकर लोगों और गोल्ड लोन कंपनियों से धोखाधड़ी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ और दिल्ली से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने के आभूषण, नकदी, डिजिटल तौल मशीन, बैंक जमा पर्ची और वारदात में इस्तेमाल की गई हुंडई आई-10 कार जब्त की गई है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायालय के आदेश पर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सिविल लाइन रामपुर में प्रार्थी संजय श्रीवास, निवासी ग्राम कोरबी धतुरा, थाना हरदीबाजार ने धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रार्थी ने बताया कि गांव के ही इंद्रेश साहू ने अपने पास 3.75 ग्राम वजन का 22 कैरेट सोने का लॉकेट होने की बात कही थी। उसने लॉकेट की कीमत लगभग 49 से 50 हजार रुपये बताते हुए 45 हजार रुपये में देने का प्रस्ताव रखा था।

इसके बाद 28 अक्टूबर 2026 को इंद्रेश साहू अपने साथियों के साथ सफेद रंग की कार से घंटाघर कोरबा के पास पहुंचा और प्रार्थी से 45 हजार रुपये लेकर लॉकेट दे दिया। कुछ समय बाद प्रार्थी ने लॉकेट की जांच दिव्य ज्वेलर्स में कराई, जहां उसकी वास्तविक शुद्धता 18 कैरेट बताई गई। इस तरह 18 कैरेट के लॉकेट को 22 कैरेट का बताकर बेचने और अधिक कीमत वसूलने का मामला सामने आया। शिकायत पर पुलिस ने अपराध क्रमांक 908/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 3(5) में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना सिविल लाइन रामपुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रार्थी की निशानदेही और उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुख्य आरोपी इंद्रेश कुमार साहू को उसके तीन अन्य साथियों के साथ घटना में प्रयुक्त आई-10 कार सहित पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपियों के आपसी संपर्क और गतिविधियों से गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा हुआ।

पुलिस के अनुसार, आरोपी 18 और 20 कैरेट शुद्धता वाले सोने के आभूषणों को 22 कैरेट का बताकर लोगों को बेचते थे। इसके अलावा इन्हीं आभूषणों को विभिन्न गोल्ड लोन संस्थाओं में गिरवी रखकर ऋण प्राप्त करने का काम भी करते थे। इस तरह धोखाधड़ी से आर्थिक लाभ अर्जित कर आपस में बांटते थे। विवेचना के दौरान मणप्पुरम फाइनेंस, जना बैंक, आईएफएल सहित अन्य वित्तीय संस्थाओं में सोने के आभूषण गिरवी रखने और ऋण प्राप्त करने से संबंधित तथ्य भी सामने आए हैं।

पुलिस ने 29 अक्टूबर को आरोपियों के मेमोरेंडम कथनों के आधार पर अलग-अलग स्थानों से नकदी, बैंक जमा पर्ची, सोने के आभूषण और डिजिटल तौल मशीन जब्त की। इंद्रेश कुमार साहू से 2,100 रुपये नकद और 40 हजार रुपये की एसबीआई एटीएम डिपॉजिट पर्ची, लिलेश्वर सिन्हा से 1,000 रुपये नकद तथा मनीष देवांगन से घटना में प्रयुक्त हुंडई आई-10 कार क्रमांक CG05AE-8013 जब्त की गई।

वहीं आशीष गर्ग उर्फ आशु के कब्जे से दो सोने के लॉकेट, जिनका कुल वजन 7.89 ग्राम है, दो जोड़ी सोने की झुमकी वजन 13.40 ग्राम (20 कैरेट), दो महिला अंगूठियां वजन 6.54 ग्राम (20 कैरेट), एक पुरुष अंगूठी वजन 3.80 ग्राम और बैटरी से चलने वाली ग्रे रंग की मिनी डिजिटल तौल मशीन बरामद की गई।

गिरफ्तार आरोपियों में इंद्रेश कुमार साहू उर्फ हरिओम (31 वर्ष), निवासी ग्राम कोरबी धतुरा, थाना हरदीबाजार, जिला कोरबा; लिलेश्वर सिन्हा (52 वर्ष), निवासी पार्वती नगर, गुढ़ियारी, जिला रायपुर; मनीष देवांगन उर्फ राहुल (47 वर्ष), निवासी सुंदरनगर, थाना डीडी नगर, जिला रायपुर तथा आशीष गर्ग उर्फ आशु (29 वर्ष), निवासी गौतम कॉलोनी, नरेला, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली शामिल हैं।

कोरबा पुलिस ने चारों आरोपियों को 29 अक्टूबर 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। फिलहाल पुलिस सोने के आभूषणों के वास्तविक स्रोत, हॉलमार्क की सत्यता, गोल्ड लोन कंपनियों में किए गए लेन-देन और गिरोह से जुड़े अन्य संभावित लोगों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।

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