केडिया परिवार के महाभंडारे के 25 वर्ष पूरे, 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया महाप्रसाद
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स्व. गणपत केडिया ने वर्ष 2001 में की थी सेवा की शुरुआत, आज भी जीवंत है सेवा और समर्पण की परंपरा
सारंगढ़, 20 अक्टूबर 2026
विजयादशमी के पावन अवसर पर सारंगढ़ में केडिया परिवार द्वारा आयोजित महाभंडारे ने सेवा, समर्पण और सामाजिक समरसता की 25 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पूरी की। इस अवसर पर 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने पूरी, सब्जी और खिचड़ी का महाप्रसाद ग्रहण किया। रावण दहन देखने पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए आयोजित यह भंडारा धार्मिक आस्था के साथ मानवीय सेवा और पारिवारिक संस्कारों की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आया।
इस सेवा परंपरा की शुरुआत वर्ष 2001 में स्व. गणपत केडिया ने नगर पालिका चौक, वर्तमान भारत माता चौक, से की थी। विजयादशमी पर रावण दहन देखने आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा के उद्देश्य से शुरू हुआ यह छोटा-सा प्रयास आज विशाल महाभंडारे का रूप ले चुका है। 25 वर्षों से निरंतर जारी इस आयोजन ने न केवल हजारों लोगों को महाप्रसाद उपलब्ध कराया, बल्कि समाज में सेवा और सहयोग की भावना को भी मजबूत किया है।

25 वर्षों से कायम है सेवा का संकल्प
समय के साथ महाभंडारे का स्वरूप और विस्तार बढ़ता गया, लेकिन सेवा का मूल भाव आज भी वही है। रावण दहन के बाद घर लौटने वाले श्रद्धालुओं के लिए केडिया निवास पर पूरी, सब्जी और खिचड़ी की व्यवस्था की गई। महिला, पुरुष, युवा और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों ने महाप्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं को सुविधाजनक तरीके से भोजन उपलब्ध कराने के लिए वितरण व्यवस्था को विशेष रूप से व्यवस्थित किया गया था।
व्यापक तैयारियां, सैकड़ों हाथों ने मिलकर संभाली व्यवस्था
20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार करना और उसका व्यवस्थित वितरण करना अपने आप में बड़ी जिम्मेदारी थी। आयोजन को सफल बनाने के लिए परिवार के सदस्यों, समाज के युवाओं, महिलाओं और अनुभवी कारीगरों ने मिलकर जिम्मेदारी संभाली।
केडिया परिवार की महिलाओं के साथ अग्रवाल परिवार की महिलाएं भी पूरी बेलने में जुटी रहीं। लगभग 25 महिला-पुरुष पूरी बेलने के कार्य में लगे थे, जबकि 10 कढ़ाइयों में लगातार पूरी तैयार की जा रही थी। सब्जी बनाने के लिए करीब 20 कारीगर जुटे रहे। वहीं, लगभग 50 सदस्यों की हलवाई टीम ने भोजन तैयार करने से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दो अलग-अलग पंडाल बनाए गए थे। एक पंडाल में महिला सेविकाएं महिला श्रद्धालुओं को भोजन परोस रही थीं, जबकि दूसरे पंडाल में पुरुष सेवक पुरुष श्रद्धालुओं की व्यवस्था संभाल रहे थे। इस सुव्यवस्थित प्रबंधन से बड़ी संख्या में लोगों को महाप्रसाद ग्रहण करने में सुविधा हुई।
सुरक्षा व्यवस्था के लिए मुस्तैद रहा पुलिस बल
आयोजन में उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। एसडीओपी गोविंद दीवान के निर्देशानुसार पुलिस बल तैनात रहा। पुलिसकर्मियों ने भीड़ को नियंत्रित करने, आवागमन सुचारु रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाव के लिए सतर्कता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाई।
राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों ने निभाई सहभागिता
महाभंडारे में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने पहुंचकर सहभागिता निभाई और आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग किया। भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल अपनी टीम के साथ उपस्थित रहीं, वहीं कांग्रेस जिला अध्यक्ष ताराचंद देवांगन भी अपनी टीम के साथ पहुंचे।
विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े, नगर पालिका अध्यक्ष सोनी अजय बंजारे और भाजपा मंडल अध्यक्ष निखिल केसरवानी भी आयोजन में शामिल हुए। इसके अतिरिक्त पूर्व अग्रसेन सेवा संघ अध्यक्ष रमेश केडिया, अग्रोहा धाम अध्यक्ष बालकिशन केडिया, सेवादल नेता गोपाल केडिया, अग्रसेन सेवा संघ अध्यक्ष दिनेश धनानिया, दिनेश केडिया, प्रहलाद लुहारीवाला, प्रकाश गोयल और राजकुमार गोयल सहित अग्रवाल समाज के सैकड़ों युवा व्यवस्थाओं में सक्रिय रहे।

समाज के युवाओं ने महाप्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन देने और आयोजन को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों की सहभागिता ने आयोजन को सामूहिक सहयोग और सामाजिक समरसता का स्वरूप प्रदान किया।
पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहा केडिया परिवार
महाभंडारे के व्यवस्थापक मनीष केडिया और मनोज केडिया ने बताया कि उनके पिता स्व. गणपत केडिया ने वर्ष 2001 में श्रद्धालुओं की सेवा के उद्देश्य से इस परंपरा की शुरुआत की थी। आज यह आयोजन 25 वर्ष की यात्रा पूरी कर चुका है। उनके अनुसार, यह महाभंडारा परिवार के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि पिता द्वारा स्थापित सेवा, संस्कार और समर्पण की विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम है।
परिवार का प्रयास रहता है कि विजयादशमी पर रावण दहन देखने आने वाले अधिक से अधिक श्रद्धालु महाप्रसाद ग्रहण कर सकें और सेवा के इस आयोजन से कोई वंचित न रहे। इसी संकल्प के साथ परिवार और समाज के सदस्य हर वर्ष आयोजन को सफल बनाने में जुटते हैं।

सेवा की परंपरा बनी समाज के लिए प्रेरणा
केडिया परिवार के महाभंडारे के 25 वर्ष पूरे होना केवल एक आयोजन की वर्षगांठ नहीं, बल्कि निरंतर सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल है। वर्ष 2001 में स्व. गणपत केडिया द्वारा शुरू की गई सेवा की यह परंपरा आज हजारों श्रद्धालुओं तक पहुंच रही है और नई पीढ़ी को भी सेवा का महत्व समझा रही है।
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। ऐसे अवसर पर हजारों लोगों को भोजन कराना और उनके प्रति सेवा भाव रखना इस पर्व के सामाजिक संदेश को भी साकार करता है। केडिया परिवार का यह महाभंडारा बताता है कि सच्ची विरासत केवल संपत्ति नहीं, बल्कि वे संस्कार और परंपराएं हैं, जो समाज के हित में पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रहती हैं। 25 वर्षों से निरंतर जल रही सेवा की यह ज्योति आने वाले समय में भी श्रद्धा, सद्भाव और समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।


