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जीवंत हो उठा छत्तीसगढ़ के अनगिनत वीर जनजातीय पुरखों का अमर स्वाभिमान

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📡 शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय बना इतिहास, शौर्य और स्वाभिमान का जीवंत केंद्र…

✒️ डॉ. ओम प्रकाश डहरिया…
सहायक जनसंपर्क अधिकारी
रायपुर, छत्तीसगढ़। 15 अगस्त 2026

रायपुर। स्वतंत्रता दिवस केवल आजादी का वार्षिक उत्सव नहीं, बल्कि उन अनगिनत वीर आत्माओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने अपना सर्वस्व भारत माता के चरणों में अर्पित कर स्वतंत्रता के वटवृक्ष को सींचा, जब पूरा देश 15 अगस्त को तिरंगे की शान में गौरवान्वित होता है, तब छत्तीसगढ़ की धरती पर स्थित ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय’, नवा रायपुर अटल नगर प्रदेश के उन जनजातीय नायकों की वीरगाथाओं को जीवंत करता है, जिनका योगदान लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में अपेक्षित स्थान नहीं पा सका।

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नें राज्योत्सव की रजत जयंती के अवसर पर 01 नवंबर 2025 को इस भव्य संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया था, लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित यह संग्रहालय केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी के उन अमर योद्धाओं के शौर्य, त्याग और स्वाभिमान का जीवंत दस्तावेज है, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के दमनकारी शासन के सामनें कभी घुटनें नहीं टेके।

📡 18वीं-19वीं शताब्दी के जनजातीय विद्रोहों की जीवंत गाथा…

छत्तीसगढ़ का इतिहास जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष, साहस और स्वाभिमान की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा रहा है, सोनाखान के अमर शहीद वीर नारायण सिंह नें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौर में जिस अदम्य साहस का परिचय दिया, वह आज भी प्रदेशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में स्थापित यह संग्रहालय प्रदेश में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को समर्पित प्रमुख स्मारक के रूप में विकसित किया गया है, संग्रहालय की 14 से 16 भव्य दीर्घाओं में लगभग 650 से अधिक जीवंत मूर्तिशिल्प के माध्यम से इतिहास को आकर्षक और प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत किया गया है।

प्रमुख सचिव सोनमणि वोरा के अनुसार, संग्रहालय में 18वीं और 19वीं शताब्दी में हुए विभिन्न जनजातीय विद्रोहों को विस्तार से दर्शाया गया है, इनमें हल्बा, सरगुजा, भोपालपट्टनम, परलकोट, तारापुर, लिंगागिरी, कोई, मेरिया, मुरिया, रानी चौरिस, भूमकाल और सोनाखान विद्रोह प्रमुख हैं।

इसके अलावा स्वतंत्रता आंदोलन में जनभागीदारी और संघर्ष की महत्वपूर्ण कड़ियों को प्रदर्शित करनें के लिए झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह पर विशेष दीर्घाएं भी तैयार की गई हैं।

📡 तकनीक के माध्यम से इतिहास का जीवंत अनुभव…

यह संग्रहालय केवल ऐतिहासिक घटनाओं और पुरानी स्मृतियों का संग्रह नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक और शोध का प्रभावशाली संगम भी है, वीएफएक्स टेक्नोलॉजी, प्रोजेक्शन वर्क और डिजिटल मीडिया के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं को इस तरह प्रस्तुत किया गया है कि दर्शक इतिहास को केवल देखते नहीं, बल्कि उसके संघर्ष और भावनाओं को महसूस भी करते हैं।

प्रत्येक दीर्घा में डिजिटल बोर्ड की व्यवस्था है, आगंतुक क्यूआर कोड स्कैन कर, अथवा मॉनिटर और माइक्रोफोन के माध्यम से संबंधित विद्रोह एवं ऐतिहासिक घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, संग्रहालय में आगंतुकों के मार्गदर्शन के लिए प्रशिक्षित गाइड्स की व्यवस्था भी की गई है।

📡 पर्यटकों के लिए आधुनिक सुविधाएं…

संग्रहालय में आगंतुकों की सुविधा और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है, यहां शुद्ध पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी सुरक्षा, प्राथमिक उपचार केंद्र और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, शिशुवती महिलाओं की सुविधा के लिए शिशु देखभाल कक्ष की भी व्यवस्था की गई है।

📡 दस महीनों में ढाई लाख से अधिक पर्यटकों ने देखा…

उद्घाटन के बाद से ही यह संग्रहालय देश-विदेश के पर्यटकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए आकर्षण तथा ज्ञान का प्रमुख केंद्र बन गया है, छुट्टियों के दौरान यहां प्रतिदिन चार से पांच हजार तक तथा सामान्य दिनों में एक से दो हजार दर्शक पहुंच रहे हैं, लगभग दस माह की अवधि में 2.50 लाख से अधिक लोग संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज एवं ओलंपिक पदक विजेता मैरीकॉम, विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, सेना के जवान तथा विदेशी पर्यटकों के दल भी संग्रहालय का भ्रमण कर चुके हैं और छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपरा एवं स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत की सराहना कर चुके हैं।

📡 आनें वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र…

संग्रहालय नें स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित किए हैं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, विभागीय मंत्री रामविचार नेताम के सतत मार्गदर्शन और प्रमुख सचिव सोनमणि वोरा के प्रशासनिक नेतृत्व में विकसित यह स्मारक छत्तीसगढ़ की जनजातीय विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचानें का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

शहीद वीर नारायण सिंह और छत्तीसगढ़ के अन्य अमर जनजातीय सेनानियों की शौर्यगाथाएं आज भी यही संदेश देती हैं कि अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होनें का साहस ही सच्ची शक्ति है।” उनका त्याग और बलिदान आनें वाली पीढ़ियों को राष्ट्र की एकता, अखंडता, स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता रहेगा।

Sanjay Mishra

Sub editor Mo.-9981295921

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