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बेसहारा बुजुर्गों का सहारा बनी सेवा भारती, पराए लोग कर रहे माता-पिता की तरह सेवा



सारंगढ़। चिलचिलाती धूप में सड़क किनारे कई घंटों से बैठी एक वृद्ध महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। राहगीर आते-जाते रहे, लेकिन किसी ने भी उसकी मदद के लिए कदम नहीं बढ़ाया। इसी दौरान सेवा भारती के सदस्य समाजसेवी सतीश यादव की नजर उस बुजुर्ग महिला पर पड़ी। उन्होंने तुरंत महिला के पास पहुंचकर उसका हाल-चाल जाना और सहायता करने का निर्णय लिया।
पूछताछ के दौरान वृद्ध महिला ने बताया कि वह सालार गांव की रहने वाली है और किसी कारणवश रास्ते में फंस गई है। उसकी तबीयत भी काफी खराब हो गई थी तथा घर पहुंचने के लिए उसे कोई साधन नहीं मिल रहा था। कई लोगों से मदद मांगने के बावजूद कोई भी उसे अपने वाहन में बैठाकर छोड़ने को तैयार नहीं हुआ।
स्थिति को देखते हुए समाजसेवी सतीश यादव ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए महिला को भोजन, पानी और कपड़े उपलब्ध कराए। इसके बाद उन्होंने अपने वाहन से सुरक्षित रूप से उसे उसके घर तक पहुंचाया। इस मानवीय पहल से न केवल महिला को राहत मिली, बल्कि आसपास के लोगों के बीच भी सेवा और संवेदना का संदेश गया।
बताया जाता है कि समाजसेवी संस्था सेवा भारती द्वारा संचालित वृद्ध आश्रम में भी बेसहारा बुजुर्गों की सेवा का कार्य लगातार किया जा रहा है। इस आश्रम का संचालन समाजसेवी सतीश यादव सेवा भारती के सहयोगियों तथा समाज के सहयोग से कर रहे हैं। यहां बुजुर्गों को भोजन, रहने की व्यवस्था और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है।
आज के समय में जहां कई बार मुसीबत के वक्त अपने ही लोग साथ छोड़ देते हैं, वहीं सेवा भारती जैसे सामाजिक संगठन आगे आकर जरूरतमंदों के जीवन में उम्मीद की किरण बन रहे हैं। संस्था के कार्यकर्ता बेसहारा बुजुर्गों की सेवा अपने माता-पिता की तरह कर रहे हैं, जो समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।

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