*बजट में गांव, गरीब, मजदूर, किसान, महिला, अजा और आदिवासी समाज की उपेक्षा – विधायक चातुरी नंद*

सरायपाली, विधायक चातुरी नंद ने वित्त वर्ष 2026-27 के राज्य बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह बजट प्रदेश की मूल समस्याओं के समाधान के बजाय केवल घोषणाओं तक सीमित है। उन्होंने कहा कि बजट में ग्रामीण क्षेत्र, महिलाओं, युवाओं तथा अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए ठोस और प्रभावी प्रावधानों का अभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
विधायक नंद ने कहा कि यह संकल्प का नहीं, जनसमस्याओं की अनदेखी का बजट है जिसमें महिलाओं, युवाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ठोस प्रावधान का अभाव है।
विधायक चातुरी नंद ने कहा कि प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी रोजगार सृजन की स्पष्ट कार्ययोजना बजट में नहीं दी गई है। केवल प्रशिक्षण और योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, जब तक कि रिक्त पदों की भर्ती, उद्योग स्थापना और स्थानीय रोजगार के अवसरों का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत न हो।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण के नाम पर भी बजट में कोई नया व्यापक आर्थिक पैकेज या ठोस योजना नहीं दिखाई देती। चुनाव के दौरान महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने की घोषणा की गई थी, किंतु इस बजट में उस वादे के क्रियान्वयन हेतु कोई स्पष्ट वित्तीय प्रावधान या योजना का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे महिलाओं में निराशा का वातावरण है।
विधायक चातुरी नंद ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संदर्भ में कहा कि इन वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए विशेष लक्षित योजनाओं और पर्याप्त बजट आवंटन की आवश्यकता थी, परंतु बजट में ऐसा कोई ठोस प्रावधान स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया। बस्तर और सरगुजा जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए भी समग्र विकास की ठोस रणनीति का अभाव दिखता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व बजट में एम्स (AIIMS) की तर्ज पर 4 सिम्स (SIMS) और आईआईटी (IIT) की तर्ज पर 4 सीआईटी (CIT) खोलने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इन घोषणाओं की जमीनी प्रगति स्पष्ट नहीं है। वर्तमान मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में शिक्षकों, डॉक्टरों और तकनीकी स्टाफ के कई पद रिक्त हैं। राजधानी रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में करोड़ों रुपये की मशीनें तकनीशियन के अभाव में पूर्ण क्षमता से उपयोग नहीं हो पा रहीं। ऐसे में नई घोषणाओं की व्यवहारिकता पर प्रश्न उठता है।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के अनेक स्कूल शिक्षकविहीन हैं, जिनमें ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूल अधिक प्रभावित हैं। शिक्षक भर्ती के संबंध में बजट में कोई समयबद्ध योजना का उल्लेख नहीं किया गया। ग्रामीण सड़कों, पेयजल, सिंचाई एवं आधारभूत संरचना जैसे मूलभूत विषयों पर भी अपेक्षित प्राथमिकता दिखाई नहीं दी।
विधायक चातुरी नंद ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी बजट में स्पष्ट प्रगति और अतिरिक्त प्रावधान का अभाव है।
उन्होंने कहा कि यदि यह बजट वास्तव में जनकल्याणकारी होता, तो इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और वित्तीय रूप से समर्थ योजनाएं शामिल होतीं।
अंत में विधायक चातुरी नंद ने सरकार से मांग की कि बजट घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए तथा महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने सहित सभी प्रमुख वादों के लिए स्पष्ट बजटीय प्रावधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रदेश की जनता को वास्तविक राहत मिल सके।