*ईंट भट्टा में बंधक मजदूर आखिर सकुशल छग लौटे*

सारंगढ़ । छग के कई जिलों से मजदूर लोग रोजी रोटी के लिए दूसरे- दूसरे राज्य हर साल पलायन करते है, जिसमें सबसे ज्यादा ईंट भट्टा और भवन निर्माण का काम होता है । हर वर्ष की तरह सारंगढ़ जिला के विभिन्न गांव से भी झार खण्ड राज्य के गुमला जिला में A S ईंट भट्टा कंपनी पर मजबूरीवश काम करने के लिए मजबूर हो गए , जिसमें नाबालिक बच्चे भी शामिल है , यह मजदूर लोग लगभग पिछले 3 माह से भट्टा पर काम कर रहे थे , प्रोडक्शन कम होने से ईंटभट्टा मालिक सतीश द्वारा मजदूरों को गाली गलौज, मारपीट किया जाता रहा , महिलाओं को गंदी नजरों से देखता था , मूलभूत सुविधा से वंचित रखा गया , सप्ताह में प्रत्येक परिवार को राशन सामग्री के लिए केवल एक हजार रूपये भट्टा मालिक द्वारा दिया जाता था , बीमार पड़ने पर कोई मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं था , मालिक का अत्याचार दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा था , ऐसे में मजदूरों ने एक बार छुपकर घाघरा थाने में आप बीती बताई , लेकिन वहां पर स्थानीय पुलिस प्रशासन ने मालिक को बता दिया जिस मालिक ने क्रूरतापूर्वक व्यवहार किया ।
एक मजदूर किसी भी तरह से भट्टा से भागकर छग पहुंचा और पलायन के मुद्दों पर काम करने वाला सामाजिक कार्यकर्ता सुशील अनंत को संपर्क किया , सुशील अनंत वर्तमान में एक सामाजिक संगठन चलाता है । सुशील अनंत द्वारा झारखंड राज्य के गुमला जिला के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ईमेल के जरिए पत्र व्यवहार भेजा और फोन पर बात कर मजदूरों को तत्काल मालिक के चंगुल से छुड़वाकर छग भेजने के लिए कहा गया , गुमला जिला श्रम विभाग और रेवेन्यू विभाग द्वारा मजदूरों को बंधक मुक्त करा कर 17 फरवरी 26 को शाम 5 बजे महेंद्रा बस से छग के लिए रवाना किया गया, 28 फरवरी 26 की सुबह सारंगढ़ सकुशल वापस लौट गए हैं । मजदूरों के चेहरे पर खुशी है ।
सुशील अनंत ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में बंधकों की फोटो भेजते हुए अपनी बात रखी है और कहा कि छत्तीसगढ़ में देखा जाए तो पिछले लगभग 12 वर्षों से पलायन के मुद्दों पर काम करते आ रहा हूं , जिसमें 8 से 10 जिले ऐसे है जहां पर हर साल पलायन का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है , छग सरकार पलायन रोकने में विफल है और स्थानीय प्रशासन भी अपने अपने क्षेत्रों पर इस मुद्दा पर थोड़ा सा भी काम नहीं करता है , जबकि ये हम सब की जिम्मेदारी बनता है , मजदूर वर्ग के लोगों को ज्यादा से ज्यादा सरकारी योजनाओं का लाभ देना चाहिए , न्यूनतम मजदूरी और बंधुआ मजदूरी पर विशेष जागरूकता होना सुनिश्चित होना चाहिए।


