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*22 साल बाद मिले सरस्वती शिशु मंदिर के पुराने साथी*

*2003 बैच के हैं सभी छात्र – छात्राएं*



सारंगढ़ । बचपन और स्कूल का साथ भुलायें नहीं भुलाया जा सकता । स्कूल के वें दिन सभी को याद रहते हैं लेकिन समय बीतने के साथ ही साथ पुराने दोस्त अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए एक दूसरे से अलग भी हो जाते हैं । ऐसे में अगर फिर से वही पुराने दोस्त मिल जाए तो वह कितना उत्साहित होंगे , यह बात उनसे बेहतर कोई नहीं जानता । रविवार 25 मई को सारंगढ़ सरस्वती शिशु मंदिर सारंगढ़ में पढ़ें 22 साल बाद के पुराने दोस्त , साथी जो बार – बार स्मृति पटल पर याद आया करते थे । वें सारे साथी आज एक साथ एक ही जगह पर एकत्र हो अपनी पुरानी यादों को एकमेक करते दिखाई दिए । नगर स्थित सबसे पुरानी स्कूल सरस्वती शिशु मंदिर में अध्ययन करने वाले  2003 बैंच के छात्रों का पुनर्मिलन कार्यक्रम इस बैच के छात्र अजय अग्रवाल के प्रयास से संपन्न हुआ । 22 वर्षों के बाद एक दूसरे से मिल रहे इन छात्रों की पढ़ाई व छात्र जीवन की यादें पुन: ताजा तरीन हो गई । सरस्वती शिशु मंदिर के बैठक हाल में यें छात्र गण एक दूसरे के हालचाल साझा किये इस बीच स्वल्पाहार भी किये ।

अनुशासन , संस्कार और सज्जनता का प्रतीक माने जाने वाला सरस्वती शिशु मंदिर जहां के छात्र-छात्राएं जीवन के हर मोड़ पर अपने उन्हीं संस्कारों के बलबूते पर जीवन जीते हुए दिखाई देते हैं , जिसकी बानगी भी 25 मई को देखने को मिली । रात्रि का भोजन बगैर खर्चीले डीनर कार्यक्रम करने के बजाय यहां सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल गली में चल रही श्रीमद् भागवत कथा दरबार में आयोजित भंडारा भोज में रात्रि का भोजन ग्रहण सभी छात्र छात्राओं ने किये । इस भंडारा भोज का सरस्वती शिशु मंदिर के 2005 बैच के छात्र अजय अग्रवाल के सानिध्य में भागवत भगवान् के महाप्रसाद का आशीर्वाद  सभी छात्र छात्राओं के साथ सहपाठियों को भी संप्राप्त हुआ । अगर ये छात्र चाहते तो डिनर कोई महंगा रेस्टोरेंट में भी कर सकते थे , किन्तु सभी छात्र गण अपने सादगी के साथ सरस्वती शिशु मंदिर के संस्कार का गाथा लिखते हुए भागवत भगवान के महाप्रसाद ग्रहण कर अपने आप को पुण्य के भागी समझे ।

सरस्वती शिशु मंदिर जहां का अनुशासन , संस्कार और संस्कृति का प्रभाव जीवन भर छात्र-छात्राओं में रह जाता है । 2003 तक पढ़े एक ही कक्षा के सभी छात्र – छात्राएं अलग-अलग रंगों के कपड़ों से सुसज्जित होकर सरस्वती शिशु मंदिर के सभागार में उपस्थित थे जहां वे शिक्षक और शिक्षिकाएं जिनके ज्ञान शिक्षा और व्यावहारिकता को लेकर उस समय के छात्र – छात्रा आज अपने परिवार के साथ स्वस्थ मस्त और व्यस्त हैं । 2003 बैंच में पढ़ाई करने वाले छात्र छात्राओं में रिंकी अग्रवाल, सुनीता तायल, रंजीता, प्राची, राधा, श्वेता तनु , अभिज्ञाकारी, मंजू पटेल, देवेन्द्र चंद्रा, बिनोद पटेल, विवेक अग्रवाल, प्रवीण केसरवानी, अजय अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, आदर्श तंबोली, महेन्द्र निषाद, अमितपटेल, दीपक अग्रवाल बबलू केडिया , शिशीर थवाईत, उपेन्द्र देवांगन, राजकुमार के साथ ही शिशु मंदिर के शिक्षक शिक्षिकाएं विजय इजारदार, श्याम देवांगन , सुभाष पटेल , अरूण उपाध्याय , राधै आदित्य, कमला स्वर्णकार, अनिता बरगाह , बिमला यादव, शांतिकहार, कुंजलता दीदी, कौशल साहू गुरुजी मौजूद थे । दीपक अग्रवाल ने बताया कि – इस कार्यक्रम में सभी मित्रों को एक साथ देख हर कोई आल्हादित व उत्साहित था । सभी एक दूसरे से कई तरह के जिज्ञासा भरे सवाल पूछे तो कुछ अपने पारिवारिक चर्चा में व्यस्त थे । उक्त जानकारी दीपक अग्रवाल ने प्रेस को दी है।

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