संचालक डॉ. संजय कन्नौजे के हाथों में छत्तीसगढ़ की विरासत, कलाकारों में जगी नई उम्मीद

36garhnewsupdate.com सारंगढ़। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, जनजातीय परंपराओं और धार्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने की दिशा में संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग में हुए प्रशासनिक बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग के नव पदस्थ संचालक डॉ. संजय कन्नौजे के पदभार ग्रहण करते ही कला एवं संस्कृति जगत में सकारात्मक माहौल बन गया है।
जिले में कलेक्टर रहते हुए विकास और प्रशासनिक कार्यशैली की विशेष छाप छोड़ चुके डॉ. कन्नौजे अब प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, उनकी प्राथमिकता प्रदेश की विलुप्त होती लोक कलाओं, पारंपरिक वाद्य यंत्रों, लोक साहित्य और उपेक्षित कलाकारों को मुख्यधारा से जोड़ने की है।
बताया जा रहा है कि विभाग अब केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित न रहकर गांव-गांव में बिखरी सांस्कृतिक प्रतिभाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए ठोस कार्य योजना तैयार कर रहा है। पंथी, राऊत नाचा, करमा, सुवा, ददरिया, चंदैनी और भरथरी जैसी लोक विधाओं के कलाकारों के दस्तावेजीकरण और प्रोत्साहन पर विशेष फोकस किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाएं प्रभावी रूप से धरातल पर उतरती हैं, तो इससे न केवल छत्तीसगढ़ की संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे।
इसके साथ ही धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के अंतर्गत आने वाले प्राचीन मंदिरों, मठों और धार्मिक स्थलों के संरक्षण, व्यवस्थापन और कायाकल्प की दिशा में भी नई पहल की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल संस्कृति जगत में डॉ. संजय कन्नौजे की नई कार्यशैली को लेकर उत्साह का माहौल है और कलाकारों की निगाहें अब विभाग की आगामी योजनाओं पर टिकी हुई हैं।


