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सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के लिए विशेष अभियान, पांडुलिपियों के संरक्षण पर जोर

  36garhnewsupdate.comरायगढ़,18मई 2026।भारत की सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के उद्देश्य से विशेष जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया एवं विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि गांवों और घरों में सुरक्षित पुरानी पांडुलिपियां केवल धार्मिक सामग्री नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक धरोहर हैं।

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय एवं राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन द्वारा देशभर में पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य साहित्य, दर्शन, विज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, धर्म और संस्कृति से संबंधित दुर्लभ दस्तावेजों को सुरक्षित रखना है।

छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों में जागरूकता कार्यक्रम, सर्वेक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य लगातार जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी हजारों दुर्लभ पांडुलिपियां निजी संरक्षण में सुरक्षित हैं, जिनकी पहचान और दस्तावेजीकरण अत्यंत आवश्यक है।

सकरबोगा गांव में प्राप्त पांडुलिपियां इस बात का प्रमाण हैं कि भारत की सांस्कृतिक जड़ें आज भी गांवों में जीवंत हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इन अमूल्य धरोहरों का संरक्षण किया जाए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी गौरवशाली विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी।

डॉ. के.के. गुप्ता ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य केवल दस्तावेजों को सुरक्षित रखना नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक धरोहर के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। उन्होंने समाज और प्रशासन के सामूहिक प्रयासों से देश की अमूल्य ज्ञान-संपदा को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर बल दिया

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