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*जिले के पहले यूरोलॉजिस्ट व रोबोटिक सर्जन बने डॉ. केडी खरे*



सारंगढ़ । चिकित्सा शिक्षा में अग्रणी परिवार के नाम से प्रसिद्ध ग्राम कोसीर निवासी सेवानिवृत्त प्रधान पाठक श्री दुजेराम खरे जी अपने शिक्षकीय कार्य सन 1986  से जशपुरनगर स्थित ग्राम बिपतपुर ब्लॉक दुलदुला से शुरू किये। तब से इन्होंने ठान लिया था कि – बच्चों को ऊँचे मुकाम तक ले जाना है इसके लिए उन्होंने पुरजोर प्रयास किया। खरे जी ने शिक्षा व स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता रखी। छोटे से सहायक शिक्षक से लेकर प्रधानपाठक तक के सफर में उन्होंने अपने सभी तीनों बेटों व बेटी को ऊंचे ओहदे तक पहुँचाकर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है।

इनके मंझले बेटे डॉ केडी. खरे 2010 बैच के शास0 चिकित्सा महाविद्यालय जगदलपुर के छात्र रहे हैं । 2017 बैच में एमएस (जनरल सर्जरी) के लिए अपने प्रथम प्रयास में शास. मेडिकल कॉलेज दरभंगा (बिहार) में दाखिला लिए जहां अध्ययन के दौरान जनरल व लैपरोस्कोपिक सर्जरी करने के बाद चिकित्सा शिक्षा के टॉपमोस्ट ब्रांच (यूरोलॉजी) हेतु 2022 बैच में आईपीजीएमईआर कोलकाता में प्रथम प्रयास में ही चयनित हुए। तदोपरांत ठीक 3 वर्ष के निश्चित अवधि में हुए अध्ययन, परीक्षा सह प्रैक्टिकल में शानदार प्रदर्शन के साथ सफलता हासिल किए । पीजीआई कोलकाता के कॉलेज सह एसएसकेएम अस्पताल में डॉ केडी खरे ने यूरोलॉजी विभाग के समस्त प्रकार के अध्ययन के साथ ऑपरेशन्स एंड्रोलॉजी में विशेषज्ञता के साथ, किडनी ट्रांसप्लांट में स्पेशलिटी तथा रोबोटिक सर्जरी सीख पाने में भी महारत हासिल की है। इस तरह की सफलता इन्हें अपने मेहनत, लगन व निरन्तरता से मिली है। अपने इस सफलता का श्रेय विभागीय व सहपाठी डॉक्टर्स तथा माता पिता  दुजेराम खरे, पत्नी डॉ लीना (गायनिकोलॉजिस्ट), बड़े भैया डॉ प्रभुदयाल संगीता खरे, छोटे भाई डॉ. गुरुदयाल एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. सुधा खरे व दीदी श्रीमती लीमा भीम प्रकाश को देते हैं साथ ही घर के सभी बच्चों के प्यार ने इस कठिन पढ़ाई को आसान बना दिया। डॉ खरे की इस उपलब्धि से पूरा अंचल इनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाओं के साथ गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

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