शिक्षिका सुनीता यादव के नेतृत्व में एक लाख सीड बॉल निर्माण अभियान का शुभारंभ
विश्व पर्यावरण दिवस विशेष...

सामुदायिक सहभागिता से हरित भविष्य की दिशा में अनूठी पहल…
सारंगढ़-बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़। 05 जून 2026
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम खिचरी में पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य के निर्माण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल की शुरुआत की गई है। खिचरी स्कूल की शिक्षिका सुनीता यादव के नेतृत्व में गांव की महिलाओं, पूर्व छात्राओं, पालक माताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं तथा बिहान समूह की महिलाओं के सहयोग से एक लाख सीड बॉल (बीज गेंद) निर्माण अभियान का शुभारंभ किया गया।
बढ़ते तापमान, घटते वन क्षेत्र और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच यह पहल समाज को प्रकृति संरक्षण के प्रति जागरूक करने का सशक्त प्रयास मानी जा रही है। शिक्षिका सुनीता यादव का मानना है कि केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर रहने के बजाय प्रत्येक नागरिक को पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। इसी सोच के साथ सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सीड बॉल तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें वर्षा ऋतु प्रारंभ होने पर जंगलों, बंजर एवं खाली भूमि पर रोपित या वितरित किया जाएगा।
अभियान के तहत गोबर और मिट्टी से तैयार की जा रही सीड बॉल्स में सरई, साजा, आम, नीम, नींबू, जामुन, सीताफल, करंज, मुनगा, पीपल, बरगद और कटहल जैसे फलदार एवं छायादार वृक्षों के बीज डाले जा रहे हैं। इन बीजों के अंकुरित होने से आने वाले वर्षों में हरित आवरण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
सुनीता यादव ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वृक्षों की कटाई के कारण प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे समय में पर्यावरण संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक दायित्व भी है। उन्होंने बताया कि यह अभियान लोगों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और बच्चों के मन में “वन है तो जीवन है” का संदेश स्थापित करने का प्रयास है।
इस अभियान में पूर्व सरपंच सुशीला सिदार, मितानिन सोनिया पटेल, पालक उत्तरा निषाद, आशा चौहान, बिहान समूह की सदस्य भानुमती महंत तथा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गुरबारी चौहान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाओं ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।
अभियान के तहत आगामी आठ दिनों में एक लाख सीड बॉल तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल न केवल ग्राम खिचरी बल्कि पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बन रही है।




