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मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना: बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा की इच्छा को पूरा करने के लिए सरकार की पहल



छत्तीसगढ़ सरकार ने बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा की इच्छा को पूरा करने के लिए मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत, आर्थिक कठिनाइयों के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित रहे श्रद्धालुओं को 19 प्रमुख तीर्थ क्षेत्रों की यात्रा कराई जा रही है, जिनमें उज्जैन, ओंकारेश्वर, पुरी, हरिद्वार, काशी, शिरडी, वैष्णोदेवी, अमृतसर, द्वारका, बोधगया, कामाख्या मंदिर और सबरीमाला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल शामिल हैं।

*मुख्यमंत्री का बयान*

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि हमारे बुजुर्गों की तीर्थ यात्रा की इच्छा अक्सर आर्थिक कठिनाइयों के चलते अधूरी रह जाती थी। उन्होंने कहा कि हमें संतोष है कि हम उनकी इस इच्छा को साकार कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि योजना में विधवा और परित्यक्त महिलाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे उन्हें भी धार्मिक स्थलों के दर्शन का गौरव प्राप्त हो सकेगा।

*समाज कल्याण मंत्री का बयान*

समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत उन श्रद्धालुओं को यह अवसर प्राप्त होगा, जो अब तक आर्थिक सीमाओं के कारण तीर्थ यात्रा से वंचित रहे हैं।

*योजना की विशेषताएं*

– *पूर्ण सुविधायुक्त पैकेज*: सरकार ने श्रद्धालुओं के लिए ट्रेन यात्रा, ठहरने, भोजन, मंदिर दर्शन, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ शामिल की हैं।
– *सुरक्षा और सुविधा*: स्पेशल ट्रेन में टूर एस्कॉर्ट, पुलिस बल और चिकित्सकों की टीम भी उनके साथ यात्रा कर रही है।
– *विधवा और परित्यक्त महिलाओं का समावेश*: योजना में विधवा और परित्यक्त महिलाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे उन्हें भी धार्मिक स्थलों के दर्शन का गौरव प्राप्त हो सकेगा।

*योजना का इतिहास*

– *आरंभ*: मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में 4 दिसंबर 2012 को की गई थी।
– *पूर्व सरकार के कार्यकाल में*: 15 जनवरी 2013 से 10 जून 2019 के मध्य इस योजना के अंतर्गत कुल 272 तीर्थ यात्राओं के माध्यम से 2,46,983 श्रद्धालुओं को लाभान्वित किया गया था।
– *वर्तमान सरकार की पहल*: पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान यह योजना 5 साल तक संचालन में नहीं थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने इसे पुनः प्रारंभ कर छत्तीसगढ़ में बुजुर्गों की श्रद्धा, आस्था और वर्षों से संजोए गए तीर्थ यात्रा के सपने को पूर्ण करने के लिए एक बार फिर पहल की है।

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