बुजुर्गों के साथ खुशियां बांटना ही सच्चा सुख – सतीश यादव

सारंगढ़। निजी खुशियां यदि बुजुर्गों के साथ बांटी जाएं तो उनका आनंद कई गुना बढ़ जाता है और आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है। वृद्धाश्रम में जाकर अपनी खुशियां साझा करने से एकाकी जीवन जी रहे बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान लौट आती है। यह बात समाजसेवी सतीश यादव ने कही।
श्री यादव अपने परिवार के साथ सारंगढ़ स्थित आशा निकेतन वृद्धाश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने बुजुर्गों के साथ अपनी पत्नी का जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर बुजुर्गों को उपहार भेंट किए गए तथा सभी के साथ सामूहिक भोजन भी किया गया। परिवार के इस आत्मीय व्यवहार से वृद्धजनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कई बुजुर्ग अपने बीते दिनों को याद कर भावुक भी हो गए।
कार्यक्रम में उपस्थित खेल अधिकारी फकीरा यादव ने कहा कि पत्नी के जन्मदिवस पर वृद्धजनों का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत आनंददायी और पुण्यदायी अनुभव है। उन्होंने समाज से अपील करते हुए कहा कि वृद्धजनों का सम्मान करना हम सभी का कर्तव्य है। परिवार से दूर रह रहे बुजुर्गों को आर्थिक एवं मानसिक सहयोग दिया जाना चाहिए, ताकि “सबका साथ, सबका विकास” की भावना को साकार किया जा सके।
इस अवसर पर मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ जन्मोत्सव मनाया गया। बुजुर्गों ने भी कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया। उन्होंने गीत गाए और कई फिल्मी गीतों पर उत्साहपूर्वक झूमते नजर आए। पूरे आयोजन का वातावरण आत्मीयता, सम्मान और खुशी से परिपूर्ण रहा।


