SARANGARH-BILAIGARH

कानून सबके लिए बराबर या जिम्मेदारों के लिए अलग नियम? हादसों पर उठे गंभीर सवाल



सारंगढ़–बिलाईगढ़। जिले में एक बार फिर ऐसी घटना सामने आई है जिसने कानून व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और आमजन के साथ समान व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को प्रतापगंज स्थित आदर्श पेट्रोल पंप, बिलासपुर रोड के पास हुई सड़क दुर्घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या नियम और कार्रवाई आम नागरिकों और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों के लिए अलग-अलग तरीके से लागू हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, महिलाओं से भरा एक वाहन राजनांदगांव से रायगढ़ की ओर जा रहा था और रास्ते में राशन सामग्री की खरीदी के लिए पेट्रोल पंप के पास खड़ा था। इसी दौरान तहसीलदार मनीष सूर्यवंशी के वाहन द्वारा टक्कर मारने का आरोप लगाया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन के दोनों एयरबैग खुल गए, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में एयरबैग केवल तेज रफ्तार या जोरदार टक्कर की स्थिति में ही सक्रिय होते हैं, जिससे घटना की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है। घटना के बाद घायल पक्ष स्वयं जिला अस्पताल पहुंचकर उपचार कराता रहा। हालांकि समाचार लिखे जाने तक मामले में किसी प्रकार की औपचारिक शिकायत या जांच की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यही बात स्थानीय लोगों के बीच असंतोष का कारण बन रही है। लोगों का कहना है कि आम नागरिकों से जुड़ी दुर्घटनाओं में तत्काल पुलिस कार्रवाई, जांच और कानूनी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, लेकिन जब मामला प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़ता है तो प्रक्रिया धीमी या निष्क्रिय नजर आती है। गौरतलब है कि इससे पहले कलेक्ट्रेट चौक के पास भी एक पुलिस अधिकारी पर कथित रूप से नशे की हालत में स्कूटी सवार को टक्कर मारने का आरोप लगा था। उस घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया था और खबरें वायरल हुई थीं, लेकिन मामला शिकायत और कार्रवाई के स्तर तक नहीं पहुंच पाया। अब ताजा घटना के बाद पुरानी घटनाएं फिर चर्चा में हैं और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर जवाबदेही तय कब होगी।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि सड़क दुर्घटना, लापरवाही से वाहन चलाना या नशे की स्थिति में वाहन संचालन जैसे मामलों में पद या प्रभाव नहीं, बल्कि कानून सर्वोपरि होना चाहिए। निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई ही प्रशासन पर जनता का भरोसा बनाए रख सकती है। फिलहाल इस मामले में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है, लेकिन आमजन की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि यह स्पष्ट संदेश जाए कि कानून सबके लिए समान है।

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